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ABN NEWS :- देश दुनिया : पाकिस्तान-भारत के टकराव से दूर रहेगा अमेरिका! दिल्ली को ज्यादा उम्मीद ना रखने का मैसेज, आखिर क्या है प्लान...

Abhyuday Bharat News / Sun, Mar 29, 2026 / Post views : 258

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भारत और पाकिस्तान के किसी भी टकराव में अमेरिका आमतौर पर सक्रिय देखा जाता है लेकिन आने वाले समय में वॉशिंगटन की भूमिका भारत-पाक के किसी टकराव में बदली हुई दिख सकती है।

वॉशिंगटन: अमेरिका की ओर से आने वाले समय में भारत के लिए रूखा रवैया देखा जा सकता है। खासतौर से पाकिस्तान के साथ किसी संघर्ष की स्थिति में अमेरिका की कोशिश भारत से दूरी बनाने की होगी, भले ही दिल्ली उनके लिए हालिया वर्षों में एक अहम साझीदार बनकर उभरा हो। अमेरिकी अधिकारियों ने दिल्ली को संकेत दे दिया है कि पाकिस्तान से जुड़े किसी संकट की स्थिति में अमेरिका खुद से भारत के साथ खड़ा नहीं होगा।

संडे गार्जियन लाइव ने भारतीय अधिकारियों के हवाले से बताया है कि वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों और राजनयिकों ने यह स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान से जुड़े किसी संकट की स्थिति में अमेरिका अपने आप भारत के साथ खड़ा नहीं होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वॉशिंगटन के फैसले पूरी तरह से राष्ट्रीय हितों से ही निर्देशित होंगे।

अमेरिका-भारत के संबंध

अमेरिकी अधिकारियों से संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत को प्रमुख रणनीतिक साझेदार के रूप में देखा जाता है। हालांकि पाकिस्तान के साथ किसी संघर्ष की स्थिति में बिना शर्त समर्थन या सहायता की उम्मीद रखना गलत है। इसे वॉशिंगटन में बढ़ रही रणनीतिक यथार्थवाद की भावना से जोड़ा जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका अब कम से कम 'नैतिक' आधार पर किसी के साथ नहीं जुड़ेगा। वह मुद्दों पर आधारित सहयोग करेगा, जो सैन्य सुरक्षा गारंटी से एक कदम पीछे रहेगा। अमेरिकी वार्ताकारों ने जोर दिया कि उनके भारत और पाकिस्तान के साथ संबंध बने हुए हैं। टकराव की सूरत में अमेरिका क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने को प्राथमिकता देगा।

पाकिस्तान को अलग-थलग नहीं करेगा अमेरिका

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वॉशिंगटन ने साफ किया है कि भारत से संकट के दौरान पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने की उम्मीद दिल्ली को उससे नहीं रखनी चाहिए। हालांकि सार्वजनिक बयानों में अमेरिकी अधिकारियों ने भारत को उभरती शक्ति माना है, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संतुलन बनाने के लिए अहम है।

रिपोर्ट के मुताबिक, नीति-निर्माताओं, सुरक्षा और खुफिया तंत्र से जुड़े लोगों के एक बड़े वर्ग का यह आंकलन है कि भारत के साथ अमेरिका के मौजूदा जुड़ाव का केंद्र चीन की बढ़ती ताकत से उसका डर है। अमेरिका की कोशिश नई दिल्ली को चीन के मुकाबले एक संतुलनकारी शक्ति के रूप में स्थापित करने की है।

US President

अमेरिका का चीन का आंकड़ा

भारतीय अधिकारियों का कहना है कि चीन के प्रति उनका दृष्टिकोण स्वतंत्र रणनीतिक गणनाओं पर आधारित है। यह किसी बाहरी अपेक्षा, जिसमें वॉशिंगटन शामिल हैं या किसी भी प्रकार के गठबंधन के दबाव पर निर्भर नहीं है। अमेरिकी नीति में भारत और पाकिस्तान को एक तराजू पर तौले जाने से भी दिल्ली खुश नहीं है।

भारत के लिए निष्कर्ष यह है कि अमेरिका के साथ बढ़ती रक्षा साझेदारी के साथ गठबंधन-शैली की प्रतिबद्धता नहीं हैं। खासकर  पाकिस्तान से जुड़ी स्थितियों में अमेरिका पल्ला झाड़ सकता है। वॉशिंगटन सुरक्षा आश्वासनों को लीवरेज टूल (सौदेबाजी के हथियार) के तौर पर देखता है। वह रणनीतिक सहायता के बदले आर्थिक तालमेल की अपेक्षा रखता है।

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# International News

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