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: सुकमा में 20 साल बाद खुले राम मंदिर में पोलिंग बूथ, कई गांवों में पहली बार मतदान

Admin / Mon, Feb 24, 2025 / Post views : 368

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नक्सल प्रभावित बड़े केड़वाल और छोटे केड़वाल में पहली बार 60 से अधिक ग्रामीणों ने मतदान किया। सुरक्षा कैंप खुलने से नक्सली डर कम हुआ, जिससे लोग 30 किमी दूर मतदान केंद्र पहुंचे। श्रीराम मंदिर 20 साल बाद खुला, जहां मतदान हुआ।

CG Panchayat Elections: सुकमा में 20 साल बाद खुले राम मंदिर में पोलिंग बूथ, कई गांवों में पहली बार मतदान
  1. पहली बार नक्सल प्रभावित गांवों में मतदान हुआ।
  2. ग्रामीण 30 किमी दूर पैदल और ट्रैक्टर से पहुंचे।
  3. 20 साल बाद श्रीराम मंदिर खुला, वहां मतदान हुआ।
बड़े केड़वाल व छोटे केड़वाल का इलाका घोर नक्सल प्रभावित था, यहां नक्सलियों की बड़ी सभाएं व जन अदालत लगती थी। चुनाव का बहिष्कार होता था, जिसके डर से ग्रामीण वोट डालने नहीं आते थे। पहली बार दोनो गांवों के करीब 5 दर्जन से ज्यादा ग्रामीण मतदान करने पहुंचे।

30 किमी. दूर मतदान करने पहुंचे

ट्रैक्टर, मोटरसाइकल व पैदल चलकर 30 किमी. दूर चिंतागुफा में ग्रामीणों ने मतदान किया। मदाताओं के चेहरों पर मतदान करने की खुशी साफ दिखाई दे रही थी। ग्रामीणों को कहना था कि बहुत हुआ अब हमे सड़क, बिजली व पानी चाहिए। गांव के विकास में हम भी अहम भागदारी निभाऐंगे। naidunia_image

नवजात बच्चों को लेकर कड़ी धूप में महिलाएं भी पहुंची

दोरनापाल-चिंतलनार मार्ग पर स्थित चिंतागुफा जहां मतदान केन्द्र में मतदाताओं की भारी भीड़ नजर आई, दोपहर में कड़ी धूप में महिलाएं दुधमुएं बच्चे को लेकर मतदान करने की लाइन में खड़ी नजर आई।
कई बुर्जुग प्रशासन द्वारा लगाए गए पंडाल में बैठे थे, तो कई लोग परिसर में जहां छांव दिखी वहां बैठकर अपने बारी का इंतजार करते दिखाई दिए। ये सभी मतदाता मतदान केन्द्र क्रमांक 60 बड़े केड़वाल व छोटे केड़वाल के थे।

कइयों ने पहली बार किया मतदान

जिसमें अधिकांश मतदाता पहली बार मतदान करने पहुंचे थे, जिन्हे कुछ युवा मतदान को लेकर समझाइश दे रहे थे। उन लोगों के चेहरे पर मतदान करने की खुशी झलक रही थी।

नक्सली बहिष्कार के कारण नहीं करते थे मतदान

ग्रामीणों ने बताया कि अब तक नक्सली बहिष्कार के कारण कभी मतदान करना तो दूर की बात चर्चा भी नहीं करते थे। इसी कारण हमारे गांव में ना तो सड़क बन पाई और ना ही मुलभूत सुविधाएं पहुंच पाई, लेकिन कैंप खुलने के बाद हालात बदल गए हैं। naidunia_image

नक्सलियों का भय हुआ दूर

अब नक्सलियों का भय नहीं लगता इसलिए इतने दूर से मतदान करने पहुंचे हैं। हम चाहते हैं कि हमारे एक वोट से हमारे गांव की सरकार बने और हमारे विकास को लेकर काम करे, क्योंकि हमारे क्षेत्र के विकास में हम पूरी भूमिका अदा करेंगे।

20 साल बाद खुले थे श्रीराम मंदिर के पट, वहां हुआ मतदान

नक्सल प्रभावित गांव केरलापेंदा जहां 1970 में श्रीराम मंदिर बनाया गया। जिसके बाद से गांव वाले सुबह-शाम वहां पूजा करते थे, लेकिन 2003 में नक्सलियों ने राम मंदिर को बंद करवा दिया। 2024 में सीआरपीएफ का कैंप खुला और जवानों की मदद से श्रीराम मंदिर के दरवाजे खोल दिए।

अब सुबह-शाम होती है आरती

जवानों व ग्रामीणों ने मिलकर साफ-सफाई की अब सुबह-शाम भगवान श्रीराम की आरती होती है। वहां पहली बार आंगनबाड़ी में मतदान केन्द्र बनाया गया। जहां मतदाता पहुंचे और अपने मताधिकार का उपयोग किया। इसके अलावा दुलेड़ में भी पहली बार मतदान हुआ।

जगरगुड़ा में 12 मतदान केन्द्र

नक्सलियों की राजधानी कहलाने वाली जगरगुड़ा, जहां इस बार 12 मतदान केन्द्र बनाए गए थे। जिसमें कामाराम मतदान केन्द्र में सुबह से मतदाताओं की भीड़ लगी थी। पूरे परिसर में लंबी लाईन की कतार थी, जिसमें महिलाएं पुरुष की संख्या लगभग बराबर थी। यहां महिलाए बोलीं हमारे गांव में पानी की बहुत समस्या है, इसलिए हम लोग पांच किमी दूर से मतदान करने आए थे ताकि पानी की समस्या हर होग सके। वही पुरुषों ने सड़क की समस्या को बताते हुए मतदान करने की बात कही।  

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