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छत्तीसगढ़ न्यूज़ : नकल करने पर रोका जाएगा रिजल्ट, 3 साल की जेल, 10 लाख जुर्माना, परीक्षा में गड़बड़ी रोकने वाले नए बिल की खास बातें

Abhyuday Bharat News / Fri, Mar 20, 2026 / Post views : 159

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छत्तीसगढ़ विधानसभा में परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने के लिए बिल पास हो गया है। इस बिल में कई सख्त प्रावधान किए गए हैं। जेल के साथ-साथ जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है।

रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र के आखिरी दिन सरकार ने कई अहम विधेयक सदन में पेश किए। शुक्रवार को सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने वाला बिल पेश किया जो सदन में पास हो गया। इस बिल में नकल रोकने और पेपर लीक के मामले में सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। अगर कोई अभ्यार्थी परीक्षा के दौरान नकल करते पकड़ा जाता है तो उसका रिल्जट रोका जाएगा। इसके साथ ही उसे 1 से 3 साल तक के लिए एग्जाम से बैन किया जा सकता है।

क्यों लाया गया है ये बिल

छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक - 2026 लाने का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं को पारदर्शी बनाना है। व्यक्तिगत रूप से या संगठित गिरोहों द्वारा इसमें किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया जा सके। पेपर लीक को रोकने की पुख्ता व्यवस्था हो सके तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से होने वाली नकल पूरी तरह से रोकी जा सके। इसके लिए यह विधेयक लाया गया है।

बिल लाने का उद्देश्य

  • राज्य में परीक्षा संबंधी अनियमितताओं की रोकथाम सुनिश्चित करना।

  • परीक्षा प्रणाली को पारदर्शिता निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना।

  • छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग, व्यापामं एवं विभागीय परीक्षाओं पर लागू।

  • व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षा भी होंगी शामिल। 

बिल में क्या है प्रावधान

अधिकारियों ने जानकारी देते हुए कहा कि नकल करते पकड़े जाने पर अभ्यार्थी को रिजल्ट रोका जाएगा और उन्हें 1 से 3 साल तक परीक्षा देने से बैन किया जाएगा। हालांकि, यह बैन स्थायी नहीं होगा और तय अवधि के बाद अभ्यर्थी फिर से परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। अन्य दोषियों के लिए भी कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। ऐसे मामलों में 3 से 10 साल तक की जेल और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, गंभीर उल्लंघन जैसे पेपर लीक, अवैध प्रवेश या रिकॉर्ड में छेड़छाड़ के मामलों में 1 से 5 साल तक की जेल और 5 लाख रुपए तक का जुर्माना लगेगा।


प्रतियोगी परीक्षा पारदर्शी रहे। व्यक्तिगत रूप से या संगठित गिरोहों द्वारा इसमें किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया जा सके। प्रश्न पत्र की लीक को रोकने पुख्ता व्यवस्था हो सके तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से होने वाली नकल पूरी तरह से रोकी जा सके। इसके लिए यह विधेयक लाया गया है।

विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़


छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2026 के तहत पेपर लीक करना या लीक कराने का प्रयास, फर्जी अभ्यर्थी बैठाना, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से नकल गतिविधियों को अपराध घोषित किया गया है। ऐसे मामलों में 3 से 10 वर्ष तक की सजा, 10 लाख रुपये तक का जुर्माने का प्रावधान है। संगठित अपराध के मामलों में एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगेगा।

सजा के लिए क्या प्रावधान

  • पेपर लीक, नकल एवं तकनीकी धोखाधड़ी पर 3 से 10 साल तक जेल और 10 लाख जुर्माने का प्रावधान।

  • दोषी संस्था या गिरोह की संपत्ति कुर्क, जब्ती का प्रावधान

  • संगठित अपराध की स्थिति में 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना

  • दोषी अभ्यार्थियों को 1 से 3 साल तक के लिए परीक्षा से प्रतिबंधित करना।

एजेंसियों पर भी होगी कार्रवाई

परीक्षा से जुड़ी एजेंसियां, आईटी एजेंसियां, परीक्षा केन्द्रों के प्रबंधक तथा सेवा प्रदाता भी परीक्षा पारदर्शिता के लिए जवाबदेह होंगे और लापरवाही किए जाने या बदनीयती से काम किए जाने पर उन पर कठोर कार्रवाई की जा सकेगी।


जांच के लिए क्या प्रावधान

  • प्रकरणों की जांच DSP स्तर से कम के अधिकारी द्वारा नहीं होगी।

  • आवश्यकता अनुसार, विशेष जांच एजेंसी को जांच सौंपने का प्रावधान।

  • त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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