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ABN NEWS : “छेरछेरा, छेरछेरा, अन्न दान देहु, धर्म कमाहु।”

Abhyuday Bharat News / Sat, Jan 3, 2026 / Post views : 264

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By :- Naval Singh

🌾 🌾 🌾 छेरछेरा के कहानी 🌾 🌾 🌾

बहुत पहिली के बात आय, जब गाँव मं नई फसल कट के घर-घर भर गे रहिस। ओ बखत किसान मन भगवान ले दुआ करत रहिन कि सबके घर मं अन्न रहे, कोनो भूखा न रहे। एही सोच ले छेरछेरा के परब सुरू होइस।

कहानी कहे जाथे कि एक बेर गाँव मं बहुत अकाल पड़िस। अनाज खतम होगे, गरीब मन भूखे रहिन। तब गाँव के बड़े-बुजुर्ग मन सब घर-घर जाके कहिन—

“छेरछेरा, छेरछेरा, अन्न दान देहु, धर्म कमाहु।”

जऊन घर मं जेतना अन्न रहिस, ओ मन खुशी-खुशी देय लगिन। कऊन चावल, कऊन धान, कऊन पैसा देय। धीरे-धीरे सब घर ले अन्न जमा होइस अउ ओला गरीब मन मं बाँट दीस। गाँव मं फेर ले खुशी आ गे।

तभे ले हर साल पौष महीना मं, नई फसल के बाद, छेरछेरा मनाय जाथे। ए दिन बच्चे, जवान, सब झोला लेके घर-घर जाथें अउ कहिथें—

“छेरछेरा माई, कोठी के धान ला छेर दे।”

छेरछेरा सिखाथे कि

बाँट के खाये मं खुशी हे

दान करे मं धर्म हे

अउ गाँव-समाज सब एक परिवार आय

एही से छेरछेरा सिरिफ परब नो हे, ये इंसानियत अउ अपनापन के पहचान आय। 🌾

By :- Naval Singh

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#CG NEWS

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