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कोरबा - कटघोरा न्यूज़ : पसान के जंगल से पेड़ की कटाई जोरो पर, वन विभाग के कर्मचारियों पर मिली भगत का आरोप

Abhyuday Bharat News / Sun, Oct 26, 2025 / Post views : 506

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कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा प्रखंड एवं वन मंडल कटघोरा के पसान रेंज स्थित सरिसामार एवं समीपवर्ती आसपास के जंगल में सराई पेड़ों की अवैध कटाई करने की खबर है। वन विभाग इस पर चुप है, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है। कटे हुए पेड़ों को रात में अवैध रूप से धुलाई की जा रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि बीते कई दिनों से वन विभाग की नाक के नीचे से सरई लकड़ी का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है और जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ आंख मूंदकर तमाशा देख रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, रात में कीमती सरई लकड़ी की कटाई कर रेंज से बाहर भेजी जा रही है। पूरा खेल ठेकेदारों, ट्रांसपोर्टरों और विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से संचालित हो रहा है।

पेड़ों की तस्करी’ में विभाग की मिलीभगत के आरोप-

ग्रामीणों ने खुलासा किया कि डिप्टी रेंजर खुद मौके पर पहुंचकर मशीन से कटाई करवाती हैं, साथ में 2–4 कर्मचारी होते हैं जो पूरी प्रक्रिया को अंजाम देते हैं।

लोगों का कहना है — “दिन में पर्यावरण की बात और रात में पेड़ों की सफाई… यही है पसान रेंज का हाल!”

अतिक्रमणकारियों को भी संरक्षण प्राप्त -

पत्रकारों द्वारा समाचार कवरेज के दौरान कुछ सड़क किनारे के स्थान की वृक्षों की कटाई की गई है और वन भूमि क्षेत्र अंतर्गत के मिट्टी मुरूम को निजी स्वार्थ के लिए कुछ स्थानीय लोग जे सी बी द्वारा खोदाई कर उसी मिट्टी मुरूम को अन्य स्थान में पटाई करते दिखे , पूछे जाने पर वन विभाग से कोई अनुमति नहीं लेना स्पष्ट बताया गया । स्थानीय लोगों से पूछने पर कहा गया की अतिक्रमण कर वन भूमि को कब्जा करने के उद्देश्य से ऐसा किया जा रहा है।

पत्रकारों जवाब न देना पड़े इसलिए ब्लैकलिस्ट कर रहे वन विभाग के डिप्टी रेंजर-

जब इस विषय पर डिप्टी रेंजर उषा सोनवानी से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने पत्रकारों के नंबर ब्लैकलिस्ट में डाल दिए। सवाल उठता है — अगर विभाग पारदर्शी है, तो सवालों से डर क्यों?

यह रवैया अब जनता और मीडिया दोनों में आक्रोश का विषय बन चुका है।

प्रशासन की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल –

जंगल में खुलेआम हो रही यह कटाई वन संपदा की डकैती से कम नहीं। फिर भी विभागीय अधिकारी अब तक किसी ठोस कार्रवाई से बचते नजर आ रहे हैं।

जनप्रतिनिधियों और पर्यावरण प्रेमियों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा —

“अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह लूट आने वाले वक्त में पूरे इलाके के पर्यावरण को खत्म कर देगी।” लेकिन हैरानी की बात यह है कि वन विभाग इस पर चुप्पी साधे बैठा है। इससे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंच रहा है। सूत्रों के अनुसार दिन में पेड़ को काट कर जंगल में छोड़ दिया जाता है। फिर रात के अंधेरे में पेड़ों को अवैध धुलाई की जाती है। कटाई के बाद जंगलों में बड़ी बड़ी खाली जगह देखी जा सकती है, जहां कभी घना हरियाली जंगल हुआ करता था। जबकि सरकार के द्वारा पर्यावरण को शुद्ध और स्वच्छ रखने के लिए लाखों रु खर्च कर पेड़ लगवाती है।

इसकी जमीनी स्तर पर क्या हकीकत है। यह जंगल जा कर देखा जा सकता है। क्षेत्र में जो भी वन संपदा है, वह धीरे-धीरे नष्ट होती जा रही है। यदि इसी तरह हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई का सिलसिला जारी रहा, तो आने वाले दिनों में क्षेत्र की हरियाली और वन संपदा पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। अब देखना ये होगा कि इस पर विभाग कब तक इसी तरह चुप रहेगा ।

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