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छत्तीसगढ़ न्यूज़ : समग्र शिक्षा कार्यालय या अव्यवस्थाओं का अड्डा ! तीन एपीसी ने डीएमसी पर अभद्रता....

Abhyuday Bharat News / Wed, Jul 22, 2026 / Post views : 223

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समग्र शिक्षा कार्यालय या अव्यवस्थाओं का अड्डा ! तीन एपीसी ने डीएमसी पर अभद्रता, तानाशाही और अनियमितताओं के लगाए गंभीर आरोप, कलेक्टर से की हस्तक्षेप की मांग

मुंगेली। जिले के समग्र शिक्षा कार्यालय की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला विभाग के भीतर से ही सामने आया है। कार्यालय में पदस्थ तीन सहायक कार्यक्रम समन्वयकों (एपीसी) ने संयुक्त रूप से जिला कलेक्टर एवं पदेन जिला मिशन संचालक, समग्र शिक्षा मुंगेली को विस्तृत शिकायती पत्र सौंपकर कार्यालय में व्याप्त कथित अव्यवस्थाओं, अनियमितताओं और जिला मिशन समन्वयक (डीएमसी) के तानाशाहीपूर्ण व्यवहार की शिकायत की है। शिकायत में न केवल कार्यालयीन व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, बल्कि कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार, विभागीय कार्यों में बाधा और शासन के निर्देशों की अनदेखी जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह शिकायत केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं रही। इसकी प्रतिलिपि राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा, रायपुर के आयुक्त, प्रबंध संचालक, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई है। ऐसे में मामला अब राज्य स्तर तक पहुंच चुका है और विभागीय हलकों में इसकी चर्चा तेज हो गई है।

बिना औपचारिक प्रभार के कराया जा रहा काम

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्हें आज तक उनके कार्यक्षेत्र का विधिवत प्रभार नहीं सौंपा गया। पूर्व जिला मिशन समन्वयक के कार्यकाल में केवल कार्य सुविधा के लिए विकासखंडों का आवंटन किया गया था, लेकिन उसका कभी औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ। इसके बावजूद वे लगातार अपने-अपने खंडों से जुड़े कार्यों का निर्वहन करते रहे।

अब आरोप है कि बिना किसी सूचना या सहमति के अन्य कर्मचारियों द्वारा उन्हीं खंडों से संबंधित फाइलें संचालित की जा रही हैं। इस संबंध में कई बार जिला मिशन समन्वयक और जिला शिक्षा अधिकारी को मौखिक रूप से अवगत कराया गया, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।

उसी कार्यालय के भीतर प्रभार को लेकर भ्रम, रिकॉर्ड प्रबंधन में कथित लापरवाही, निरीक्षण व्यवस्था पर सवाल, समीक्षा बैठकों का अभाव और कर्मचारियों के साथ कथित अभद्र व्यवहार जैसे आरोप सामने आते हैं, तो यह केवल एक कार्यालय का मामला नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

अब निगाहें जिला प्रशासन और राज्य परियोजना कार्यालय पर टिकी हैं कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच किस स्तर पर होती है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो व्यवस्था सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

शिकायत पत्र

विभाग का पक्ष

इस पूरे मामले में जिला शिक्षा अधिकारी एल.पी. डाहिरे तथा जिला मिशन समन्वयक अशोक सोनी का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क किया गया। हालांकि समाचार लिखे जाने तक दोनों अधिकारियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी।

सप्ताहभर तक गोपनीय रही शिकायत, अब आई सामने

गौरतलब है कि यह शिकायत करीब एक सप्ताह पहले की गई थी। चूंकि मामला विभागीय शिकायत से जुड़ा था, इसलिए इसे गोपनीय रखा गया था। हालांकि जिला कलेक्टर कार्यालय से होते हुए जब शिकायत राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा तक पहुंच गई, तब यह मामला सार्वजनिक हो सका।

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