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वर्ष 2025 में इस अभियान के तहत लगभग 2.8 मिलियन क्यूबिक मीटर जल का भूजल में पुनर्भरण किया गया, जो सैकड़ों बड़े तालाबों के बराबर है। छत्तीसगढ़ वाटर बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार जिले में भूजल स्तर में 5.41 मीटर की वृद्धि दर्ज की गई, जो इस मॉडल की प्रभावशीलता को दर्शाती है।
इस संबंध में सीईओ जिला पंचायत डॉ आशुतोष चतुर्वेदी ने राज्य में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में मोर गांव मोर पानी अभियान संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोरिया में कलेक्टर के दिशा निर्देश में 'आवा पानी झोंकी अभियान' के तहत न सिर्फ रहवासी क्षेत्र बल्कि कृषकों को ध्यान में रखते हुए जन भागीदारी से किसानों ने खेतों में सोखता गड्ढे बनाया जिससे जल स्तर में बढ़ोतरी हुई अभी भी यह कार्य जारी है। साल 2025 में 5.41 मीटर की बढ़ोतरी हुई थी। वहीं, इस साल संरचनाएं और लोगों की भागीदारी बढ़ी हैं।
वहीं, स्थानीय किसान विशाल कुमार दास और परमेश्वर राजवाड़े ने प्रदेश सरकार के इस पहल की सराहना की। विशाल कुमार दास ने कहा कि इस छोटे सोखता गड्ढे से खेतों में नमी बनी रहती है और जलस्रोत बना रहता है। परमेश्वर राजवाड़े ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से सोखता गड्ढा हमारे लिए बनाए गए हैं। इससे हमें बहुत फायदा होने वाला है। जब बारिश होगी तो इस गड्ढे में पानी एकत्र होगा और खेत में नमी बनी रहेगी। इससे खेत में फसलों को लाभ मिलेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में कैच द रेन वाटर, जल संचय, जन भागीदारी अभियान चलाया जा रहा है। इसी के तहत राज्य में भी अभियान चल रहा है। इस मॉडल से जल संरक्षण हो रहा है।
डॉ आशुतोष चतुर्वेदी, सीईओ जिला पंचायत
दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में कोरिया जिले के किसानों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे नवाचार बड़े बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने बताया कि किसानों ने अपने खेतों में छोटे सोखता गड्ढे बनाकर वर्षा जल को खेतों में ही रोकने का प्रभावी उपाय किया, जिससे भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 5 प्रतिशत मॉडल का ही यह नतीजा रहा कि छोटे प्रयास से बड़ा परिणाम मिला।
पीएम मोदी ने मन की बात में की थी इस पहल की तारीफ
कोरिया जिले के हर गांव में शुरू हो रही है पानी की पहल
किसानों ने अपने खेतों पर अपनाया 5 प्रतिशत मॉडल
छोटे प्रयाल का दिखने लगा है अब बड़ा परिणाम
कोरिया जिले में लागू '5 प्रतिशत मॉडल' के तहत किसानों ने अपनी भूमि का पांच प्रतिशत हिस्सा जल संरचनाओं के निर्माण के लिए समर्पित किया है। इस पहल में छोटे-छोटे सोखता बना कर वर्षा जल को एकत्रित किया गया और जल संचय की दिशा में परिणाम बेहद सकारात्मक मिले, जिससे वर्षा जल का संरक्षण संभव हो पाया। इस मॉडल को 1200 से अधिक किसानों ने अपनाया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता जनभागीदारी रही। महिलाओं ने 'नीर नायिका' और युवाओं ने 'जल दूत' के रूप में जिम्मेदारी निभाई। ग्राम सभाओं के माध्यम से योजनाओं का विकेंद्रीकरण किया गया, जिससे स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने और क्रियान्वयन की प्रक्रिया मजबूत हुई। इससे समुदाय स्वयं इस अभियान का नेतृत्वकर्ता बन गया।
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