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वेस्ट बंगाल :- कोलकाता न्यूज़ : महिला को नहीं छूना भले वो मुस्लिम क्यों न हो कोलकाता को पाकिस्तान में जाने से बचाने वाले ने जिन्ना के प्लान पर फेरा पानी

Abhyuday Bharat News / Fri, Apr 10, 2026 / Post views : 251

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पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गरमा गया है। आमार सोनार बांग्ला सीरीज के तहत पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता को लेकर एक दिलचस्प कहानी के बारे में जानते हैं।

नई दिल्ली/कोलकाता: यह अगस्त, 1946 की बात है, जब भारत से अलग मुस्लिमों के लिए एक अलग देश पाकिस्तान बनाने के लिए मुस्लिम लीग के फाउंडर मोहम्मद अली जिन्ना एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। वह चाहते थे कि उनके प्रस्तावित पाकिस्तान में तत्कालीन कलकत्ता (आज कोलकाता) भी शामिल किया जाए। अगर, जिन्ना का यह प्लान कामयाब होता तो आज कोलकाता बांग्लादेश में होता, जिसे 1971 की जंग से पहले पूर्वी पाकिस्तान कहा जाता था। मगर, जिन्ना का यह प्लान एक इंसान ने फेल कर दिया, जिसका नाम था गोपालचंद्र मुखर्जी। उन्हें गोपाल पाठा मुखोपाध्याय भी कहा जाता था। गोपाल मुखर्जी ने अगस्त, 1947 में बंटवारे से पहले मुस्लिम लीग के कलकत्ता को सैन्य बलों के जरिए कब्जे की योजना को फेल कर दिया। आमार सोनार बांग्ला सीरीज के तहत जानते हैं ये दिलचस्प कहानी। वो भी तब जब पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल, 2026 को विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

जिन्ना और सुहरावदी ने बनया कलकत्ता पर कब्जे का प्लान

  • रिपोर्टों के अनुसार, जिन्ना के साथ-साथ मुस्लिम लीग के नेता बंगाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री हुसैन शाहिद सुहरावर्दी ने फोर्स के जरिये कोलकाता पर कब्जे का प्लान बनाया था। ब्रिटिश भारत के दौर में बंगाल में पीएम पद होता था, जो बंटवारे के बाद समाप्त कर दिया गया था।

  • इसका मतलब यह था कि बड़े पैमाने पर हिंदुओं का नरसंहार किए जाने की योजना थी। ऐसे तनाव भरे माहौल में जिन्ना ने 'सीधी कार्यवाही दिवस' बुला लिया।

  • कौन थे गोपाल पाठा, जिन्हें तब पुलिस मानती थी क्रिमिनल

    • गोपाल पाठा का जन्म 1913 में कोलकाता में हुआ था। पाठा का मतलब बंगाली में बकरे को कहा जाता है। नाम में पाठा लगाने का मतलब यह था कि उनका परिवार कॉलेज स्ट्रीट पर मीट शॉप चलाता था। गोपाल पाठा को अक्सर कलकत्ता को मुस्लिम लीग के हाथों में जाने से बचाने वाला कहा जाता है।

    • मूंछे रखने वाले गोपाल पाठा को पुलिस क्रिमिनल मानती थी। मगर, हकीकत यह थी कि उन्होंने लड़कों की एक आर्मी बनाई थी, जो हिंदुओं की रक्षा के लिए उनके एक इशारे पर काम करते थे। कलकत्ता में जब दंगे फैले तो गोपाल मुखर्जी ने इन लड़कों की मदद से कई हिंदुओं और हिंदू परिवारों की जान बचाई।

    • गोपाल पाठा ने कई मुस्लिमों की भी बचाई थी जान

      • द इंडियन एक्सप्रेस के एक लेख में ब्रिटिश इतिहासकार और पत्रकार एंड्रयू व्हाइटहेड ने मुखर्जी की भूमिका के बारे में कहा था-'कलकत्ता आग की लपटों में घिरा हुआ था और गोपाल पाठा ने एक तरह से शहर को केरोसिन से भिगोने का अवसर उठाया।' मगर, मुखर्जी के लिए यह 'संकट में फंसे लोगों की मदद करना मेरा कर्तव्य था।'

      • बाद में गोपाल मुखर्जी के पोते शांतुनु मुखर्जी ने कहा था कि उनके दादा ने कई मुस्लिम परिवारों की भी जान बचाई थी। टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में उन्होंने दावा किया था कि उनके दादाा गोपाल मुखर्जी ने कई मुस्लिमों को अपने घरों में शरण दी थी। उन्होंने एक रिक्शा चलाने वाले रफीक चाचा के परिवार को भी बचाया था।



      गोपाल ने कहा-सीता का अपहरण कर रावण हुआ बर्बाद

      • 1997 में इतिहासकार एंड्रयू व्हाइटहेड ने जब बूढ़े हो चुके गोपाल मुखर्जी से पूछा कि आपके लड़कों ने क्या किसी मुस्लिम महिला से बदतमीजी थी। तब उन्होंने विनम्रता से कहा था-उन्हें सख्त आदेश थे कि किसी भी महिला को नहीं छूना है।

      • उन्होंने कहा-मैंने सख्त आदेश दिया था कि किसी महिला के साथ बदतमीजी नहीं करनी है और न ही मारना है। भले ही वो मुस्लिम ही क्यों न हो। हमारे इतिहास में रावण को भी सीता का अपहरण करने पर बर्बाद होना पड़ा था। इसीलिए, मैंने दो कड़े आदेश दिए थे-न तो लूटना है और न ही किसी महिला के साथ बदतमीजी करनी है। गोपाल मुखर्जी की 2005 में मौत हो गई थी।



      मुस्लिम लीग पाकिस्तान में कलकत्ता को क्यों चाहती

  • अब जरा 1940 के दशक में चलते हें, जब जिन्ना ने अंग्रेजों के सामने द्विराष्ट्र का सिद्धांत रखा और भारत से अलग पाकिस्तान की मांग रखी। जिन्ना की अगुवाई वाली मुस्लिम लीग को बड़ी चिंता नए पाकिस्तान की डेमोग्राफी को लेकर था।

  • दरअसल, जिस मुस्लिम बहुल बंगाल प्रांत के पूर्वी हिस्से को पाकिस्तान में जाना था, उसमें उद्योगों का अभाव था। ये इंडस्ट्री ज्यादातर कलकत्ता और हावड़ा जैसे शहरों में ही थी, जो पश्चिमी हिस्से में पड़ता था।

  • जिना ने बुलाया प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस

    • ऐसे वक्त में जिन्ना की मुस्लिम लीग एक प्लान लेकर आई, जिसने पूरे क्षेत्र में आग लगा दी। जिन्ना ने 16 अगस्त, 1946 को 'डायरेक्ट एक्शन डे' बुलाया, ताकि कलकत्ता मुस्लिम लीग के हाथों में चला जाए।

    • जिन्ना के इस आह्वान से पूरे बंगाल में हिंसा शुरू हो गई। दंगे भड़क उठे। बंगाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री और मुस्लिम लीग के नेता हुसैन शाहिद सुहरावर्दी ने मस्जिदों ने हिंसा भड़काने वाली कई स्पीच दीं।

    • इस दंगे के वक्त हिंदुओं के घरों और दुकानों में आग लगा दी गई। उन्हें मारा गया और महिलाओं के साथ रेप किया गया है। अगले दिन 17 अगस्त को हिंदू एकजुट होने लग गए। इसी बीच गोपाल मुखर्जी ने भी अपने लड़ाकों के साथ मोर्चा संभाला। उनकी व्यायाम समिति एक तरह से आर्मी का काम कर रही थी, जो हिंदुओं की रक्षा के लिए उतर पड़ी। उन्होंने हर तरह के हथियार जुटाए। डंडों, चाकुओं, बंदूकों से लैस वो और उनके लड़ाके कलकत्ता शहर को बचाने के लिए निकल पड़े थे।

    • द ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स कहे जाने वाले इस नरसंहार में कम से कम 10,000 लोग मारे गए। इस पर फिल्मकार विवेक अग्निहोत्री ने द बंगाल फाइल्स भी बनाई, जिसे लेकर देशभर में मिली जुली प्रतिक्रिया रही।



    अमेरिकी सैनिकों का रिवॉल्वर भी हासिल किए

    • इसमें रिवॉल्वर भी थे, जिसे दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिकों से हासिल किया गया था। उस दौरान कलकत्ता के बड़ा बाजार के मारवाड़ियों ने खूब फंडिंग की थी।

    • मुखर्जी को डर था कि कहीं कलकत्ता को पाकिस्तान में शामिल न कर लिया जाए। उन्होंने दंगे के दौरान ऐलान किया-एक हत्या के जवाब में तुम 10 को मारो। कुछ समय बाद ही मुस्लिम लीग को यह अहसास हो गया कि कलकत्ता को पाकिस्तान में लाने का उसका सपना पूरा नहीं किया जा सकता है। साथ ही गोपाल मुखर्जी का सामना करना भी मुश्किल होता जा रहा था।

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