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नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी को झटका देते हुए अलग गुट बनाने वाले 20 बागी सांसदों ने खुद को 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' ( NCPI ) में विलय करने का फैसला किया। NCPI त्रिपुरा की गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है, जिसने 2023 के विधानसभा चुनाव 'सात स्ट्रोक वाले इंक पेन' के चुनाव चिह्न पर लड़ा था। हालांकि, इस पार्टी के न तो कोई सांसद हैं और न ही कोई विधायक हैं। लेकिन अब अचानक 20 सांसदों के मिलने से यह एनडीए को समर्थन देने वाली दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है। तो चलिए जानते हैं कि एनसीपीआई कैसे भविष्य में एनडीए को फायदा पहुंचाने वाली है...
टीएमसी के 20 बागी सांसदों के एनसीपीआई में शामिल होने के बाद एनडीए को समर्थन देने से बीजेपी के बाद दूसरा सबसे बड़ा सहयोगी बन गया है। एनसीपीआई के समर्थन के बाद एनडीए के पास लोकसभा में कुल 312 सांसद हो जाएंगे। जिससे लोकसभा में विपक्षी दलों की संख्या कम हो जाएगी।
निचले सदन (लोकसभा) में सांसदों की संख्या बढ़ने से एनडीए सरकार के लिए महत्वपूर्ण विधेयकों और संवैधानिक संशोधनों (जैसे महिला आरक्षण, परिसीमन विधेयक 2026) को पारित कराने के लिए बहुमत जुटाना अधिक आसान हो जाएगा। हालांकि, इस विधेयक को पिछले संसद सत्र में उस समय बड़ा झटका लगा जब 298 सांसदों ने इसके पक्ष में और 238 सांसदों ने इसके खिलाफ वोट किया। जिसके बाद यह बिल गिर गया था।
बागी सांसदों के मुताबिक एनसीपीआई में यह विलय दलबदल विरोधी कानून के दायरे में 2 तिहाई बहुमत के नियमों का पालन करते हुए किया गया है ताकि उनकी सदस्यता बची रहे और वे एनडीए को एक मजबूत क्षेत्रीय मंच के रूप में समर्थन दे सकें।
इन 20 सांसदों के NDA को समर्थन देने से इंडिया ब्लॉक कमजोर हो जाएगा। विपक्षी दलों के कमजोर होते ही एनडीए को आने वाले संसद सत्र में कई विधेयकों को पास कराने में आसानी होगी।
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