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असम :- गुवाहाटी न्यूज़ : कांग्रेस पर चिपक गया 'मियां' मुस्लिम वाला लेबल, खुद मार ली पैर में कुल्हाड़ी, क्यों असम पूरे भारत के लिए सबक है...

Abhyuday Bharat News / Tue, May 5, 2026 / Post views : 207

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असम का चुनाव परिणाम कांग्रेस के लिए बहुत बड़ी सबक है। असम में कांग्रेस आज अगर सिर्फ मुस्लिम-बहुल सीटों तक सिमट चुकी है तो इसकी वजह भी वह खुद है।

गुवाहाटी: असम में कांग्रेस को जिस तरह का झटका लगा है, उससे उसकी राजनीति की जड़ें हिल चुकी हैं। राज्य में पार्टी के दोनों शीर्ष नेता गौरव गोगोई और देबब्रत सैकिया अपनी सीटें भी नहीं बचा पाए। कांग्रेस ने असम की सत्ता में वापसी के लिए प्रचार में दो तरह के हथियार अपनाए थे, दोनों ही पूरी तरह से फेल हो गए। अगर असम में कांग्रेस के चुनाव परिणाम का विश्लेषण करें तो यह पूरे भारत के लिए एक सबक की तरह है।

असम में चुनाव प्रचार के दौरान गौरव गोगोई की अगुवाई में पार्टी ने बीजेपी पर अटैक के लिए दो तरह के हथियार का इस्तेमाल किया। एक तो मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के परिवार पर निजी हमले शुरू किए। दूसरा जुबीन गर्ग की मौत पर चुनावी रोटियां सेंकने की कोशिश की। लेकिन, यह दोनों ही मुद्दा बैकफायर कर गया

।

मुस्लिम-बहुल सीटों तक सिमटी कांग्रेस

असम में कांग्रेस को सिर्फ 19 सीटें मिलीहैं। हमारे सहयोगी अखबार ET की रिपोर्ट के अनुसार तथ्य यह है कि ये सभी सीटें मुस्लिम-बहुल हैं। मतलब, कांग्रेस को वो सीटें मिली हैं, जो कभी वो इत्र कारोबारी बदरुद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ के साथ साझा किया करती थी। एआईयूडीएफ के इत्र की खुशबू फीकी पड़ी है तो कांग्रेस को उन सीटों पर सिर छिपाने की जगह मिली है।

खुद ही 'मियां-मुस्लिम' पार्टी बन गई कांग्रेस!

मुस्लिम बहुल सीटों से एआईयूडीएफ का बाहर होना और कांग्रेस की पकड़ मजबूत होने का मतलब साफ है कि सीएम हिमंत बिस्वा सरमा असम के वोटरों को लगातार जो संदेश देना चाह रहे थे, उसमें वो सफल हो गए। उन्होंने कांग्रेस को 'मियां' पार्टी का तमगा पहनाना चाहा और कांग्रेस ने खुद ही वह तमगा अपने गले में डाल लिया।

हिंदुओं और मूल आदिवासियों से दूर हुई कांग्रेस

  • असम में 'मियां' शब्द बांग्लादेश के बंगाली बोलने वाले मुसलमानों के लिए इस्तेमाल होता है।

  • कांग्रेस 'मियां' मुसलमानों की पार्टी है, इस ठप्पे ने उसे असम के मूल आदिवासियों और हिंदू वोटरों से पूरी तरह से दूर कर दिया।

  • रही-सही कसर 2023 में हुए परिसीमन ने पूरी कर दी।

  • परिसीमन के बाद असम में मुस्लिम-बहुल विधानसभा सीटों की संख्या 35 से घटकर 22 रह गई है।

  • इनमें से इस बार 19 कांग्रेस के खाते में गई है, 2 पर एआईयूडीएफ जीता है और 1 पर टीएमसी का खाता खुला है।


असम में कांग्रेस को यह हार बहुत चुभ रही होगी

  • असम में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग 30% या मोटे तौर पर 75 लाख है।

  • मतलब, कांग्रेस ने अपनी पहुंच इस आबादी के बीच तो मजबूत की है, लेकिन खुद को राज्य के बड़े चुनावी परिदृश्य से बाहर कर लिया है।

  • 6 दलों के साथ गठबंधन भी किया, लेकिन उससे भी कुछ नहीं हुआ।

  • असम के बहुसंख्यक वोटरों की मार ऐसी पड़ी की दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे-असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई और विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया अपने-अपने गढ़ों को भी नहीं बचा पाए।

  • गौरव गोगोई, पूर्व सीएम तरुण गोगोई के और देबब्रत सैकिया पूर्व मुख्यमंत्री हितेश्वर सैकिया के बेटे हैं।

  • गौरव गोगोई की हार इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह दिल्ली में राहुल गांधी के सबसे भरोसेमंद लेफ्टिनेंट हैं, तो लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के नंबर-टू नेता।


असम का परिणाम कांग्रेस के लिए बड़ी सबक है

  • कांग्रेस को असम के मतदाताओं ने अपने जनादेश से साफ संदेश दे दिया है।

  • प्रदेश में उसकी सत्ता में वापसी का रास्ता, उन हिंदू और मूल आदिवासी-बहुल सीटों से होकर गुजरता है, जहां के लिए उसने खुद को पराया बना लिया है।

  • कांग्रेस का यह हाल बीजेपी की राजनीति की वजह से नहीं हुआ है।

  • कांग्रेस पार्टी ने खुद बढ़-चढ़कर अपने लिए इसी तरह का चुनावी मैदान तैयार किया है।

  • कांग्रेस केरल से लेकर गुवाहाटी तक जिस रणनीति पर चल रही है, उसने अबकी बार असम में रेड सिग्नल दिखा दिया है।

  • ज्यादा दिन नहीं हुए, जब तेलंगाना के कांग्रेसी मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने सार्वजनिक तौर पर यह कबूल किया कि 'कांग्रेस मतलब मुसलमान और मुसलमान मतलब कांग्रेस'।

  • अबकी बार कांग्रेस को मालूम हुआ है कि इस नीति पर चलने से एक वोट बैंक का वोट तो मिल सकता है, लेकिन अगर मुकाबला बीजेपी जैसी पार्टी से हो तो केरल की तात्कालिक मुस्कान बाकी भारत में बुरे सपने में भी बदल सकती है।

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