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: बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को मिला सम्मान, पंडी राम मंडावी को राष्ट्रपति ने पद्मश्री से नवाजा

Admin / Wed, May 28, 2025 / Post views : 219

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गोंड मुरिया जनजाति से ताल्लुक रखने वाले पंडी राम मंडावी (68) पारंपरिक वाद्ययंत्रों खासकर बस्तर बांसुरी जिसे स्थानीय भाषा में सुलुर कहा जाता है, उसे बनाने में माहिर हैं.

रायपुर. छत्तीसगढ़ के बस्तर की पारंपरिक वाद्ययंत्र निर्माण कला और लकड़ी की शिल्पकला को राष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठा दिलाने वाले नारायणपुर जिले के पंडी राम मंडावी को देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदान किया. गोंड मुरिया जनजाति से ताल्लुक रखने वाले 68 वर्षीय पंडी राम मंडावी पारंपरिक वाद्ययंत्रों विशेषकर बस्तर बांसुरी जिसे स्थानीय भाषा में ‘सुलुर’ कहते हैं, उसके निर्माण में माहिर हैं. पंडी राम मंडावी ने न केवल बांसुरी बल्कि लकड़ी पर की जाने वाली बारीक चित्रकारी, मूर्तिकला और विभिन्न शिल्पकृतियों के माध्यम से बस्तर की पारंपरिक कला को वैश्विक पहचान दिलाई है. पंडी राम ने यह कला 12 से 16 वर्ष की आयु के बीच अपने पूर्वजों से सीखी थी और तब से ही बस्तर की सांस्कृतिक परंपराओं को संजोने और आगे बढ़ाने के कार्य में लगे हैं. उनकी कलाकृतियां न केवल छत्तीसगढ़ में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रदर्शित की गई हैं और खूब सराही गई हैं. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी बधाई पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद छत्तीसगढ़ में हर्ष का माहौल है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पंडी राम मंडावी को बधाई देते हुए कहा कि यह पूरे राज्य के लिए गौरव का क्षण है. मंडावी जी ने बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को देश-दुनिया में नई ऊंचाई दी है.  

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