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: कागजों पर हरियाली : सीपत सर्किल में पौधारोपण के नाम पर जमकर भ्रष्टाचार, मामले पर जांच की आवश्यकता

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डिप्टी रेंजर अजय बेन के प्रभार क्षेत्र सीपत सर्किल में पौधारोपण के नाम पर जमकर भ्रष्टाचार, मामले पर जांच की आवश्यकता

अभ्युदय भारत न्यूज़ (संतोष साहू)

 

बिलासपुर – छत्तीसगढ़ प्रदेश में वन विभाग को हरा हंडा के नाम से भी कहा जाता है. इस हंडा कि देखरेख एवं सुरक्षा का जिम्मा वन विभाग में पदस्थ सिपाही से लेकर साहब तक की होती है. लेकिन बड़े दुर्भाग्य की बात है कि कुछ जगह पर इस हरा हंडा (वन विभाग) के रक्षक ही भक्षक बन जाते हैं. कुछ इसी तरह का वाक्या न्यायधानी मतलब जिला बिलासपुर में देखने को मिल रहा है.

 

 

बिलासपुर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सीपत सर्किल पर पौधा रोपण कार्य के नाम पर आकांठ भ्रष्टाचार किया गया है. इस क्षेत्र का प्रभारी अजय बेन होना बताया जाता है. सूचना का अधिकार से प्राप्त दस्तावेज के अनुसार इस सर्किल के अंतर्गत आने वाले कारीछापर आर. एफ 06 में विभिन्न प्रजाति के कुल 47,230 नग पौधारोपण किया जाना कागजो में बताया गया है. जिसमें सागौन 33,340, आवला 5,030, अर्जुन 1500,काला सिरस 1020, करंज 2240, बीजा 600, हलटू 500, सोनपत्ति 220, महुआ 780, कुसुम 400 आंवला 620, जामुन 500 बहेड़ा 480 नग पौधा शामिल है. इस कार्य को करने हेतु शासन से प्राप्त आबंटित राशि क्रमशः प्रथम वर्ष 67,42,800 द्वितीय वर्ष 60,14000 तृतीय वर्ष 18,91000 चतुर्थ वर्ष 8, 39000 पंचम वर्ष 5, 89000 रुपए प्राप्त हुआ था. उक्त प्राप्त आवंटन राशि से गोबर खाद, वर्मी कंपोस्ट, खंभा एवं तार कंटूर ट्रेंच कार्य, फेंसिंग सामग्री (सीमेंट, रेती, गिट्टी,) का उपयोग करके मजदूर के माध्यम से कार्य का होना बताया गया है.जिसमे पौधा परिवहन कार्य ट्रैक्टर, माजदा एवं ट्रक से किया गया है. लेकिन मौके पर भौतिक स्थिति कुछ और ही बया कर रही है. अगर मामले की निष्पक्षता से जांच होती है तो भौतिक सत्यापन करने वाले वरिष्ठ अधिकारीयो तक जांच की आंच पहुंच सकती है.

आर. एफ 06 में किए गए 47,230 पौधारोपण की वर्तमान स्थिति

सीपत सर्कल के अंतर्गत आने वाले कारीछापर आर. एफ 06 में किए गए पौधा रोपण से संबंधित सूचना का अधिकार से प्राप्त दस्तावेज के तहत भौतिक स्थिति का पड़ताल किया गया. तब वहां नजारा कुछ और ही रहा. सर्वप्रथम दस्तावेज को अगर देखा जाए तो उक्त स्थान पर पौधा परिवहन के लिए जिस ट्रैक्टर, माजदा एवं ट्रक बताया गया है उन वाहनों का रजिस्ट्रेशन नंबर का उल्लेख दस्तावेज में नहीं किया गया है.

दूसरी ओर बात किया जाए प्रजाति वार पौधों की तो जितनी संख्या में पौधा रोपण होना कागज पर बताया गया है मौके पर वर्तमान में नहीं दिख रहा है.

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