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छत्तीसगढ़ न्यूज़ : जिसके नाम से कांपता था जंगल, 25 लाख का था ईनाम, उसी देवा का छोटा भाई बना टीचर, गांव में स्कूल खोलने की मांग...

Abhyuday Bharat News / Wed, Apr 8, 2026 / Post views : 13

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छत्तीसगढ़ के बस्तर में अब बदलाव की बयार दिखाई देने लगी है। बस्तर में हार्डकोर नक्सली माने जाने वाले इलाकों में अब शिक्षा की नई पहल जगी है।

सुकमा: छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ जवानों को सफलता मिली है। राज्य में सशस्त्र नक्सलवाद के खात्मे की घोषणा की गई है। सुकमा जिले में जहां कभी नक्सलियों का गढ़ हुआ करता था अब वहां स्कूल खोलने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसके साथ ही कभी नक्सली संगठन के टॉप लीडर माने जाने वाले बारसे देवा का छोटे भाई लोगों को शिक्षा के लिए प्रेरित कर रहा है।


शिक्षा को लेकर बदलाव

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान और मुख्यधारा में लौटने के बदलाव की बयार उन इलाकों में भी पहुंच गई जिन्हें नक्सलियों का गढ़ माना जाता था। नक्सलियों के मिलिट्री दलम के कमांडर रहे आत्मसमर्पित नक्सली बारसे देवा के गांव में भी शिक्षा को लेकर लोगों में पहल दिख रही है। ओयोपारा में नक्सलियों का जनताना स्कूल संचालित होते थे, वहां शिक्षा विभाग की टीम बच्चों और युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अभियान चला रही है।

ऐसा कहा जाता है कि इस गांव में देवा के बेटे और भाई को छोड़कर कभी कोई बच्चा स्कूल गया ही नहीं। बताया जाता है कि देवा के बेटे ने इस साल 12वीं क्लास का एग्जाम दिया है। इसके साथ ही देवा का भाई बुधरा बारसा सिलगेर में अतिथि शिक्षक बनकर बच्चों को पढ़ा रहा है। वह गांव के लोगों को शिक्षा के प्रति जागरुक कर रहा है।

  • खूंखार नक्सलियों में गिना जाता था बारसे देवा

  • 25 लाख से ज्यादा का ईनामी था बारसे देवा

  • फोर्स के खिलाफ कई बड़े हमलों में था शामिल

  • बारसे देवा का भाई अब जगा रहा है शिक्षा


ओयोपारा में खुलने चाहिए स्कूल

बुधरा के अनुसार, देवा के सरेंडर के बाद हालात बदल गए हैं। अब हमारी मांग है कि ओयोपारा में भी स्कूल खोला जाए। पहले भी यहां स्कूल था लेकिन यहां जनताना सरकार के बारे में जानकारी दी जाती थी। इस स्कूल मेंबच्चों को माओवादी विचारधारा, संगठन के दस्तावेज पढ़ाए जाते थे। बुधरा ने कहा कि यहां के लोगों को अब जनताना नहीं वास्तविक शिक्षा की आवश्यकता है।

नए स्कूलों का प्रस्ताव भेजा है

सुकमा जिला कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था। लेकिन अब यहां हालात बदल गए हैं। कोंटा ब्लॉक में 22 नए स्कूल खोलने का प्रस्ताव शासन और प्रशासन को भेजा गया है। पूरे बस्तर में स्कूल खोजने के प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। दंतेवाड़ा के जिला शिक्षा अधिकारी जीआर मंडावी ने बताया कि नई स्कूलों के लिए प्रपोजल भेजे जा रहे हैं। बस्तर अब बंदूक से किताब की तरफ बढ़ रहा है।

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