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छत्तीसगढ़ न्यूज़ : नाबालिग की रेप के बाद गला दबाकर हत्या, हाईकोर्ट ने DNA प्रोफाइलिंग को माना सबसे अहम सबूत, आरोपी की अपील खारिज

Abhyuday Bharat News / Sat, Apr 11, 2026 / Post views : 271

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बिलासपुर:- बीजापुर जिले में नाबालिग के साथ रेप कर गला दबाकर उसकी हत्या के आरोपी की अपील को खारिज कर दी है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इस केस में DNA प्रोफाइलिंग को सबसे अहम सबूत माना है, और आरोपी की मौत तक कैद की सजा को बरकरार रखा है।

कोर्ट ने कहा कि सेक्सुअल असॉल्ट का घिनौना अपराध, जिसका नतीजा मर्डर होता है। पक्का मेडिकल सबूत और भरोसेमंद डीएनए प्रोफाइलिंग से साबित होता है, और सबूत के स्तर को पूरी तरह से पूरा करता है। अगर ऐसे सबूत कोर्ट का भरोसा जगाते हैं, तो यह सजा का अकेला आधार बन सकता है।

नाबालिग की दादी को भरोसा देकर ले गया था साथ

बीजापुर जिले के एक गांव में 13 जनवरी 2020 को मृतक एक नाबालिग लड़की मार्केट की ओर गई थी। उस समय उसकी दादी ने उसके अकेले जाने पर एतराज़ किया और उसे रोकने की कोशिश की। आरोपी ने दखल दिया और दादी को भरोसा दिलाया कि वह उसके साथ मार्केट जाएगा और उसे सुरक्षित घर वापस ले आएगा। इस भरोसे पर नाबालिग को आरोपी के साथ जाने दिया गया।

हालांकि उसके बाद नाबालिग लापता हो गई, और बाद में एक लाश मिलने की जानकारी मिली। मौके पर पहुंचने पर मृतक के रिश्तेदारों ने लाश की पहचान लापता लड़की के रूप में की। घटनास्थल पर ही गांव में अप्राकृतिक मौत की सूचना दर्ज की गई, और आरोपी के खिलाफ़ आईपीसी की धारा 302 के तहत जुर्म किया गया। जांच की कार्रवाई करने से पहले गवाहों को सीआरपीसी की धारा 175 के तहत नोटिस जारी किए गए, और उसके बाद जांच का पंचनामा तैयार किया गया।

मृतक के शरीर को रिक्विजिशन के ज़रिए पोस्टमॉर्टम जांच के लिए भेजा गया और उसके पूरा होने पर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट रिकॉर्ड में लाई गई, जिसके बाद शरीर परिवार वालों को सौंप दिया गया। घटनास्थल से कई आपत्तिजनक सामान जब्त किए गए। ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के बाद आरोपी बबलू को रेप और हत्या का दोषी करार किया गया। जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई। इस अपील पर हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद पूरे मामले पर गौर करते हुए कहा कि जब रिकॉर्ड पर मौजूद सभी सबूतों को एक साथ और पूरी तरह से देखा जाता है, तो अपील करने वाले के खिलाफ ये हालात पक्के तौर पर साबित होते हैं, कि पीड़ित की हत्या से मौत हुई है। जैसा कि डॉ. दीपिका सिन्हा के मेडिकल सबूत और पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट से साबित होता है, जिसमें साफ तौर पर कहा गया है कि मौत का कारण गला घोंटने से दम घुटना था।

यह कहा गया है कि, अपील करने वाला 19 जनवरी 2020 से कस्टडी में है, इसलिए वह ट्रायल कोर्ट के आदेश के अनुसार सज़ा काटेगा। रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि इस फैसले की एक कॉपी उस जेल के सुपरिटेंडेंट को भेजी जाए, जहां अपील करने वाला जेल की सज़ा काट रहा है, ताकि अपील करने वाले को यह सजा दी जा सके और उसे बताया जाए कि वह इस कोर्ट के दिए गए मौजूदा फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकता है, जिसके लिए वह हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज़ कमिटी या सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज़ कमेटी की मदद ले सकता है।

पुलिस ने मृतक के शरीर में मिले मानव स्पर्म का डीएनए कराया था। जिसमे आरोपी का डीएनए मैच हुआ था। कोर्ट ने इस वैज्ञानिक साक्ष्य को सबूत माना, साथ ही गवाहों के बयान इससे मिले है।

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