Fri, 15 May 2026
Logo

ब्रेकिंग

छत्तीसगढ़: कोरबा में हाथियों का तांडव, फसलों को भारी नुकसान

अघोषित आपातकाल की ओर बढ़ रहा देश’— जयसिंह अग्रवाल का केंद्र सरकार पर हमला, महंगाई-ईंधन संकट पर उठाए सवाल...

’छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की पुनर्विकास योजनाओं (Re-development) में तेजी, शासन स्तर पर वि

रायपुर : ’इकोनॉमी के विकास के लिए वैल्यू एडिशन आधारित उत्पादन करना होगा -राज्यपाल डेका’

पति पत्‍नी और वो दो' मूवी रिव्‍यू

नमाज नहीं, लंदन से आएगी वाग्देवी की मूर्ति, भोजशाला परिसर मंदिर है, एमपी हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों ने दिल्ली में अमित शाह से की मुलाकात

आज का मौसम 15 मई: अगले 24 घंटे के अंदर 10 राज्यों में तूफानी बारिश का अलर्ट, 70 KM की रफ्तार से चलेगी हवा IMD की चेतावनी

तेल-गैस पर हाहाकार, लंबा खिंच रहा पश्चिम एशिया संकट, रूसी तेल पर छूट बढ़ाए अमेरिका, भारत की मांग

बाकी वसूली किस्तों में की जाएगी, जनता चुकाएगी कीमत; पेट्रोल-डीजल दाम बढ़ने पर भड़के राहुल गांधी

सूचना

: भारतीय जनता मजदुर संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ प्रकाश अनन्त ने "गुरु घासीदास जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की है।

Admin / Thu, Dec 19, 2024 / Post views : 189

Share:

ABN EXPRESS NEWS 24x7

डॉ प्रकाश अनन्त ने अपने शब्दों में कहा है कि सत्य, करुणा और मानवता के प्रतीक गुरु घासीदास जी ने समाज को सत्य के मार्ग पर चलने और समानता का संदेश दिया। आइए, हम उनके आदर्शों को अपनाकर समाज में भाईचारा, शांति और सद्भावना का संचार करें। जय सतनाम!"**

गुरु घासीदास जी का जन्म 18 दिसंबर 1756 को छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के गिरौदपुरी गांव में हुआ था। वे एक साधारण किसान परिवार में जन्मे थे। उनके पिता महंगू दास और माता अमताई थीं। जीवन के प्रारंभिक समय में ही गुरु घासीदास जी ने समाज में व्याप्त अंधविश्वास, जातिवाद, भेदभाव और अन्य सामाजिक बुराइयों को देखा और उनके खिलाफ आवाज उठाने का संकल्प लिया।

सतनाम पंथ की स्थापना

गुरु घासीदास जी ने "सतनाम पंथ" की स्थापना की, जिसका मूल आधार "सत्य" था। उन्होंने लोगों को यह शिक्षा दी कि सत्य ही ईश्वर है और मानव को सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए। उनका नारा "सतनाम का जाप करो और सत्य के मार्ग पर चलो" आज भी उनके अनुयायियों का पथप्रदर्शन करता है।

भेदभाव के खिलाफ संदेश

गुरु घासीदास जी का सबसे प्रसिद्ध संदेश था - "मनखे-मनखे एक समान"। इसका अर्थ है कि सभी मनुष्य समान हैं, चाहे वे किसी भी जाति, धर्म या वर्ग के हों। उन्होंने समाज में व्याप्त छुआछूत और भेदभाव का कड़ा विरोध किया और समानता का संदेश फैलाया।

तपोभूमि गिरौदपुरी

गिरौदपुरी को गुरु घासीदास जी की तपोभूमि माना जाता है। यहीं पर उन्होंने कठोर तपस्या की और सत्य की खोज की। गिरौदपुरी धाम आज सतनाम पंथियों के लिए एक पवित्र स्थल है, जहां प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन और प्रार्थना के लिए आते हैं।

गुरु घासीदास जी की शिक्षाएं

  • 1. सत्य को अपनाओ – सत्य का अनुसरण ही जीवन का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।

  • 2. भेदभाव से दूर रहो – सभी मनुष्य समान हैं और किसी में कोई ऊंच-नीच नहीं है।

  • 3. अहिंसा का पालन करो – हिंसा से दूर रहकर प्रेम और भाईचारे का प्रचार करो।

  • 4. सादा जीवन, उच्च विचार – सादगी और ईमानदारी से जीवन बिताओ

गुरु घासीदास जी के उपदेशों ने समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाया। उन्होंने गरीबों, दलितों और शोषितों को समानता और सम्मान का अधिकार दिलाने के लिए कार्य किया। उनके अनुयायी आज भी "सतनाम" के पथ पर चलते हुए समाज में शांति, भाईचारे और सद्भाव का संदेश देते हैं।

गुरु घासीदास जी के विचार और शिक्षाएं समय के साथ और प्रासंगिक होती जा रही हैं। छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में उनके अनुयायी उनकी जयंती को बड़े हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाते हैं।

उनकी शिक्षाएं हमें यह प्रेरणा देती हैं कि हम सत्य, अहिंसा और समानता के मार्ग पर चलें और समाज में प्रेम और भाईचारा स्थापित करें।

"गुरु घासीदास जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं। सतनाम के महान संत गुरु घासीदास जी के सत्य, अहिंसा और समानता के विचार हमें हमेशा सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते रहें। उनकी शिक्षाओं से प्रेरित होकर हम समाज में प्रेम, सद्भावना और एकता का संदेश फैलाएं

Tags :

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

जरूरी खबरें

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

Related Posts