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बिलासपुर न्यूज़ : मस्तूरी गोलीकांड क़े आरोपियों ने क्यों..छुपाया असल गुनहगार कों..?

Abhyuday Bharat News / Tue, Nov 11, 2025 / Post views : 240

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28 अक्टूबर को मस्तूरी में नहर के पास शाम 6:00 के लगभग जनपद उपाध्यक्ष नितेश सिंह के निजी ऑफिस में जो फायरिंग की घटना हुई उसे बिलासपुर पुलिस ने 29 अक्टूबर को ही उसी पुलिस ने सात आरोपियों को पकड़कर हल करने का दावा किया। इस तारीख में जो प्रेस विज्ञप्ति जारी हुई अपराध क्रमांक 736 /25 धारा 109(3)(5) बीएनएस 25, 27 आर्म्स एक्ट पांच आरोपियों के अतिरिक्त दो को नाबालिग बताया गया था। बाद में नाबालिग को त्रुटि सुधार कर बालिग किया गया। इसी विज्ञप्ति में विश्वजीत को तारकेश्वर पाटले ने विश्वजीत को 1 लाख रुपए नगद देने और इस राशि को विश्वजीत अनंत ने आरोपियों में वितरित किया इसकी तस्दीक की जा रही है। कहां गया उसके बाद एक नवंबर को फिर से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी हुई जिसमें कहा गया की विवेचना क्रम में दो और आरोपी पकड़े गए। पहले का नाम अकबर खान और दूसरे का देवेश सुमन उर्फ निक्कू सुमन इस तरह आरोपियों की संख्या 9 हो गई और विवेचना में एक अन्य धारा संगठित अपराध बीएनएस 111 जोड़कर विवेचना की बात कही, और इसी विज्ञप्ति में कहा गया कि अकबर खान ने नागेंद्र राय का नाम लिया।

मस्तूरी क्षेत्र में नागेंद्र राय और तारकेश्वर पाटले की मित्रता सब जानते हैं। 1 तारीख के पश्चात मस्तूरी गोलीकांड के समाचार शांत हो गए। झगड़े को ज़मीन के क्रय विक्रय अतिक्रमण करने तथा राजनीतिक वर्चस्व से जोड़ा गया।

कांग्रेस शासन के समय ही नितेश सिंह और साथियों ने 36 मॉल के सामने विश्वजीत और अन्य पर प्राण घातक हमला किया था और विश्वजीत को बुरी तरह ठुकाई की थी। प्रकरण अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है। सवाल उठता है कि ठाकुरों के विरुद्ध विश्वजीत की ताकत इतनी कैसे बढ़ गई अपराध की दुनिया में ठाकुरों की कहानी 2001 के पूर्व से चल रही है।

खुली सड़क पर इसी ऑफिस के सामने दो से अधिक कत्ल किए गए हाईकोर्ट से भी सजा बरकरार रही और उनका राजनीति के अतिरिक्त मुख्य काम गैर कानूनी जुआ , ब्याज का है। विश्वजीत और अकबर खान तारकेश्वर पाटले और नागेंद्र राय का नाम लेते हैं उनका धंधा ब्याज और जुआ का नहीं है। ऐसे में प्रतिद्वंद्वी कैसे हो गए......?

दूसरा अकबर खान की राजनीति में जिस गुट का विश्वसनीय सदस्य रहा और अपनी ही राजनीतिक पार्टी के पेट और पीठ में छुरा मारता रहा वह किसके कहने पर यें सब जानते हैं।

रेलवे में उसे सफाई का ठेका किसके इशारे पर मिला इसकी भी कहानीयां है। इस कहानियों में उसकी डोर कभी भी कहीं भी किसी भी मसले में नागेंद्र राय के हाथ में नहीं रही।

आखरी बार जेल जाने और जेल से जमानत पर छूटने के बाद यह तो देखा ही जाना चाहिए कि नागेंद्र राय, तारकेश्वर पाटले का अकबर खान से कितना संपर्क रहा और कैसा रहा। इस बात की पर्याप्त गुंजाइश है कि मस्तूरी गोलीकांड का मास्टरमाइंड और असली वित्तीय प्रबंधन कोई और है और शातिर गिरफ्तार आरोपी उसका नाम नहीं ले रहे अन्य का नाम लेकर कहानी को उलझा कर जेल चले गए। पूरी घटना की विवेचना अभी भी चल रही है पर खबरें न आना अपने आप में आश्चर्य जनक है।

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#CG NEWS

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