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दिल्ली न्यूज : बांग्लादेश में भारत के नए राजदूत हो सकते हैं पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी बंगाल चुनाव के बीच केंद्र का बड़ा दांव

Abhyuday Bharat News / Sun, Apr 19, 2026 / Post views : 127

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मोदी सरकार एक बहुत बड़ा फैसला लेने जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी बांग्लादेश में भारत के नए हाई कमिश्नर हो सकते हैं। भारत सरकार ये फैसला ऐसे समय लेने जा रही है, जब बांग्लादेश लगातार भारत के साथ अपने संबंध सुधारने की कोशिश में लगा है। बंगाल चुनाव के बीच मोदी सरकार के इस फैसले से सभी हैरान हैं।

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में चुनाव के बीच मोदी सरकार ने एक तगड़ा दांव खेला है। केंद्र पूर्व केंद्रीय मंत्री, बीजेपी नेता और बैरकपुर से सांसद दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का हाई कमिश्नर बनाकर भेज सकता है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक लंबे समय बाद पड़ोसी देश में पहले राजनीतिक नियुक्त व्यक्ति के तौर पर त्रिवेदी करियर डिप्लोमैट प्रणय वर्मा की जगह लेंगे। प्रणय वर्मा अब ब्रसेल्स जाकर EU में भारत के राजदूत का पद संभालेंगे।

UPA शासनकाल में रह चुके हैं मंत्री

रिपोर्ट के मुताबिक त्रिवेदी के लिए ढाका में तारिक रहमान सरकार से सहमति मांगी जाएगी। 75 वर्षीय अनुभवी राजनेता को बांग्लादेश में भारत के दूत के तौर पर भेजने का फैसला विदेश मंत्रालय के राजनयिकों के लिए जवाबदेही का एक संदेश भी है। बता दें कि त्रिवेदी UPA शासनकाल के दौरान तृणमूल कांग्रेस के सदस्य के रूप में रेल मंत्री और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री थे। उन्होंने 12 फरवरी, 2021 को TMC से इस्तीफा दे दिया और 6 मार्च 2021 को BJP में शामिल हो गए।

संबंध सुधारने की कोशिश में भारत-बांग्लादेश

त्रिवेदी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब भारत और बांग्लादेश मोहम्मद यूनुस प्रकरण के बाद अपने संबंधों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। बता दें कि दोनों देशों के संबंध तब खराब हुए, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को एक तख्तापलट के जरिए सत्ता से हटा दिया गया था और सेना तथा पुलिस दोनों ने ही प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से इनकार कर दिया था। अमेरिका समर्थित यूनुस के कार्यकाल के दौरान भारत और बांग्लादेश के संबंधों में गिरावट आई थी।

नेताओं को दूत बनाने पर भी विचार

हालांकि, दिनेश त्रिवेदी की नियुक्ति मोदी सरकार की ओर से एक स्पष्ट संकेत है कि वह प्रमुख देशों में भारत के दूत के तौर पर राजनीतिक नेताओं को भेजने के प्रति अनिच्छुक नहीं है। ये अत्यंत प्रतिष्ठित पद केवल भारतीय विदेश सेवा के अधिकारियों के लिए ही आरक्षित नहीं हैं। जहां एक ओर पूर्व सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने 2019 से 2022 तक सेशेल्स में भारतीय उच्चायुक्त के रूप में कार्य किया, वहीं ढाका में त्रिवेदी की नियुक्ति इस बात का भी संकेत है कि भारत अब अपने पड़ोसी देशों में राजदूत के तौर पर कद्दावर हस्तियों को भेजेगा और कम से कम भारतीय उपमहाद्वीप में तो 'अच्छे दिनों वाले राजदूतों' का दौर अब खत्म हो चुका है।

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