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बता दें कि अभिजीत दिपके शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत NEET, NTA में धांधली, SSC पेपर लीक समेत कई मुद्दों को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। अभिजीत दिपके को सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक का समर्थन मिला है। उनके आंदोलन में नीट पेपर लीक के बाद सुसाइड करने वाले छात्रों के परिजन भी पहुंच रहे हैं।
वहीं जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे सीजेपी फाउंडर अभिजीत दिपके ने एक इंटरव्यू में विवादित बयान दे डाला। सीजेपी फाउंडर ने कहा कि अगर मैं खालिद होता या मुसलमान होता तो अब तक मैं जेल में होता। इसकी मुझे अवेयरनेस है। उनके इस बयान के बाद लोग उमर खालिद को लेकर चर्चा करने लगे हैं, जोकि दिल्ली दंगों के आरोप में करीब पांच साल से जेल में बंद है। सुप्रीम कोर्ट से भी खालिद को जमानत नहीं दी है।
दिपके ने कहा कि मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि सत्ता में बैठे लोग इतने उदासीन और अहंकारी कैसे हो सकते हैं कि उन्हें उन परिवारों से संपर्क करने की भी जरूरत महसूस नहीं होती। न्होंने कहा कि आप उनके बच्चों को वापस नहीं ला सकते, लेकिन कम से कम इतना तो कर सकते हैं कि उनके परिवारों से मिलकर खेद व्यक्त करें और माफी मांगें।
पीड़ित परिवारों को न्याय के लिए भीख मांगने को छोड़ा
अभिजीत दिपके ने छात्रों के सुसाइड मामलों का जिक्र करते हुए सरकार की उदासीनता की आलोचना की और उस पर पीड़ित परिवारों से संपर्क नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने एक्स पर कहा कि दीप मेघवाल, आकांक्षा चतुर्वेदी, अमायरा कुमार और कहान पटेल- के नाम लेते हुए कहा कि उनके परिवारों को न्याय के लिए भीख मांगने की स्थिति में छोड़ दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के किसी भी प्रतिनिधि ने उनके परिवारों से संपर्क करके बच्चों की मौत पर खेद तक व्यक्त नहीं किया।
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