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Admin / Mon, Jul 29, 2024 / Post views : 232
ABN EXPRESS NEWS 24x7
नेताजी के पोते ने कहा कि नेताजी के अवशेषों को दिल्ली लाया जाना चाहिए और नेताजी को श्रद्धांजलि देने के लिए एक स्मारक बनाया जाना चाहिए।
महान स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चन्द्र बोस के पोते चंद्र कुमार बोस ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से 18 अगस्त तक जापान के रेंकोजी मंदिर से नेता जी के पार्थिव अवशेषों को भारत वापस लाने की अपील की. उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में केन्द्र सरकार से अंतिम बयान आना चाहिए,ताकि नेता जी के बारे में झूठे आख्यानों पर विराम लग सके। बोस ने कहा कि एनडीए के नेतृत्व वाली सरकार ने स्वतंत्रता सेनानी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने की पहल की है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी 10 जांच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय के जारी होने के बाद यह स्पष्ट है कि नेता जी 18 अगस्त 1945 को ताइवान में एक हवाई दुर्घटना में मारे गए थे।
बोस ने रविवार को मोदी को लिखे अपने पत्र कहा इसलिए यह जरूरी है कि भारत सरकार की ओर से अंतिम बयान दिया जाए ताकि भारत के मुक्तिदाता के बारे में झूठी कहानियों को खत्म किया जा सके।
उन्होंने कहा मेरी आप से विनम्र अपील है कि 18 अगस्त 2024 तक नेता जी के पार्थिव अवशेषों को रेंकोजी से भारत वापस लाया जाए।
पीटीआई विडियोज को दिए एक साक्षात्कार में पश्चिम बंगाल भाजपा के पूर्व उपाध्यक्ष बोस ने गोपनीयता हटाने की प्रक्रिया से गोपनीय फाइल और दस्तावेज उजागर हुए है जो निर्णायक रूप से स्थापित करते है कि नेता जी की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को हवाई दुर्घटना में हुई थी।
उन्होंने कहा नेता जी स्वतंत्रता के बाद भारत लौटना चाहते थे लेकिन ऐसा नहीं हो सका क्योंकि विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई।
बोस ने कहा कि यह बेहद अपमान जनक हैं कि नेता जी के अवशेष जापान के रेंकोजी मंदिर में रखे गए हैं। उन्होंने कहा हम पिछले तीन साल से प्रधानमंत्री को लिख रहे हैं कि भारत के मुक्तिदाता को सम्मान देने के लिए उनके अवशेषों को भारतीय धरती पर लाया जाना चाहिए।
बोस ने कहा नेताजी की बेटी अनिता बोस फाफ हिंदू परंपरा के अनुसार उनका अंतिम संस्कार करना चाहती हैं। उन्होंने साक्षात्कार में कहा मुझे लगता है कि भारत सरकार को जवाब देना चाहिए। अगर उन्हें लगता हैं कि यह अवशेष नेता जी के नही है तो उन्हें रेंकोजी मंदिर में रखने के लिए रख रखाव प्रदान नहीं किया जाना चाहिए।
बोस ने कहा की कुछ साल पहले उनके परिवार के सदस्य रेंकोजी मंदिर गए थे और वहां के महायाजक से मिले थे और जिन्होंने कहा था कि नेताजी ने भारत की स्वतंत्रता के लिए लडाई लड़ी थी इसलिए उनके अवशेषों को भारत ले जाना चाहिए।
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