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ABN NEWS :- देश दुनिया : 'भारत ही युद्ध समाप्त कर सकता है': पश्चिम एशिया पर बोले मोहन भागवत- देश की जनता मानवता को मानती है...

Abhyuday Bharat News / Fri, Mar 20, 2026 / Post views : 134

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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि अब दुनिया भर के देश पश्चिम एशिया में जारी युद्ध रोकने के लिए भारत की ओर देख रहे हैं। उन्होंने कहा है कि दुनिया में जंगल का कानून चलता है, लेकिन भारत के लोग मानवता का नियम पालन करते हैं।

नई दिल्ली: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि दुनिया मान रही है कि सिर्फ भारत ही पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को खत्म कर सकता है। मोहन भागवत ने विभिन्न देशों की ओर से इस युद्ध को रोकने के लिए भारत को दखल देने के लिए कहने का हवाला दिया है। ऐसे देशों में संयुक्त अरब अमीरात और फिनलैंड सबसे आगे रहे हैं।

विश्व के कई देशों ने यह भावना जाहिर कि है कि जिस तरह से भारत के अमेरिका और इजरायल से अच्छे संबंध हैं और ईरान से भी पुरानी मित्रता है। इसमें ही यह क्षमता है, जो दोनों पक्षों के बीच दखल देकर जंग पर पानी डाल सकता है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने नागपुर में एक कार्यक्रम में विश्व के इसी नजरिए पर जोर दिया है। 

'दुनिया को सद्भाव चाहिए, संघर्ष नहीं'

नागपुर में विश्व हिंदू परिषद के विदर्भ प्रांत कार्यालय का शिलान्यास करने के बाद मोहन भागवत ने एक सभा को संबोधित करते हुए वैश्विक संघर्ष की जड़ और सौहार्द के माध्यम से इसके समाधान के बारे में बात की है। उन्होंने कहा कि 'युद्ध स्वार्थी हितों का परिणाम है, दुनिया को सद्भाव चाहिए, संघर्ष नहीं।

'लड़खड़ाते विश्व में संतुलन बनाना हमारा कर्तव्य'

भारत और दुनिया की सोच में अंतर के बीच लकीर खींचते हुए आरएसएस चीफ ने कहा, 'भारत के लोग मानवता के कानून का पालन करते हैं, लेकिन बाकी दुनिया जंगल के कानून का पालन करती है। धर्म का आधार देकर लड़खड़ाते हुए विश्व में संतुलन कायम करना हमारा कर्तव्य है।


चले हुए युद्ध में बार-बार देशों से आवाज उठ रही कि इसको समाप्त भारत ही कर सकता है। क्यों, क्योंकि भारत की इस प्रवृत्ति का ज्ञान उनको है। इसलिए ये काम होना है। पहले हमको तैयार होना पड़ेगा।

मोहन भागवत, आरएसएस प्रमुख


'हम जबसे उठने लगे हैं, प्रचंड जागृति पहले शुरू हो गई'

  • मोहन भागवत के पश्चिम एशिया युद्ध को लेकर कहा कि करीब 2,000 वर्षों से दुनिया ने विभिन्न संघर्षों के समाधान का प्रयास किया है, लेकिन कई चुनौतियां बनी हुई हैं।

  • उन्होंने यह भी ध्यान दिलाया कि धार्मिक असहिष्णुताजबरन धर्मांतरण और श्रेष्ठता और हीनता का विचार अभी भी मौजूद है।

  • ऐसे में मोहन भागवत ने बताया कि भारत का परंपरागत दर्शन एकता और परस्पर संबद्धता को बढ़ावा देता है।

  • आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारतीय सोच का आधार ये है कि हर कोई जुड़ा हुआ है और मॉडर्न साइंस भी धीरे-धीरे इसी समझ की ओर बढ़ रहा है।

  • उनका कहना है कि स्थायी शांति सत्ता संघर्ष से नहीं, एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से आ सकता है।

  • उन्होंने कहा कि धर्म धर्मग्रंथों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि दैनिक व्यवहार में भी प्रदर्शित होना चाहिए। (पीटीआई इनपुट के साथ)

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