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मौसम विभाग अलर्ट : अल नीनो की दस्तक से बदलेगा मौसम का ‘मूड’, मई-जून से झुलसाएगी गर्मी, बारिश पर पड़ेगा सीधा असर!

Abhyuday Bharat News / Sat, Apr 25, 2026 / Post views : 129

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मई-जून में अल नीनो के जल्द आने की चेतावनी से भारत समेत दुनिया में गर्मी बढ़ने और मानसून कमजोर पड़ने की आशंका है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के मुताबिक, इससे हीटवेव तेज होंगी, बारिश का पैटर्न बदलेगा और जल व कृषि पर दबाव बढ़ सकता है।

el nino early arrival india heatwave

भारत समेत पूरी दुनिया में भीषण गर्मी का संकट मंडरा रहा है

नई दिल्ली: मौसम के मिजाज में बड़ा बदलाव आने वाला है और इसके असर से भारत समेत पूरी दुनिया भीषण गर्मी से झुलस सकती है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि अल नीनो इस बार तय समय से पहले, मई से जुलाई के बीच ही विकसित हो सकता है। इसका सीधा असर तापमान और बारिश के पैटर्न पर पड़ेगा। पहले जहां इसके अगस्त-सितंबर में आने की संभावना जताई जा रही थी, अब इसके जल्दी दस्तक देने के संकेत ने मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है।


मानसून पर खतरे की घंटी, कम बारिश के आसार

अल नीनो की आहट के साथ ही भारत में मानसून को लेकर अनिश्चितता गहराने लगी है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) पहले ही 'सामान्य से कम' बारिश का अनुमान जता चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अल नीनो मजबूत हुआ, तो यह खेती, जल भंडारण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल सकता है। खासकर वर्षा-आधारित कृषि वाले इलाकों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है।


हर जगह पड़ेगी गर्मी की मार

WMO की ताजा रिपोर्ट साफ संकेत दे रही है कि मई-जून-जुलाई के दौरान दुनिया भर में जमीन का तापमान सामान्य से ज्यादा रहेगा। इसका मतलब है कि भारत में भी भीषण हीटवेव का खतरा बढ़ सकता है। इससे बिजली की मांग, पानी की खपत और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ेगा। शहरों में ‘हीट आइलैंड’ प्रभाव और ज्यादा तीखा हो सकता है।

  • चिंता की एक और बड़ी वजह हिमालयी क्षेत्र में बर्फ का तेजी से घटता स्तर है। हिंदूकुश-हिमालय क्षेत्र में इस साल बर्फ की मौजूदगी सामान्य से 27.8% कम दर्ज की गई है, जो 20 साल में सबसे कम है। यह स्थिति नदियों के प्रवाह को प्रभावित कर सकती है और करीब दो अरब लोगों की जल सुरक्षा पर खतरा पैदा कर सकती है।

  • भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जो अल नीनो के विकसित होने का बड़ा संकेत माना जाता है। WMO के अनुसार, जलवायु मॉडल अब इस पर लगभग एकमत हैं कि आने वाले महीनों में अल नीनो की स्थिति और मजबूत होगी। यह बदलाव वैश्विक मौसम प्रणाली को प्रभावित करेगा।


कहीं सूखा, कहीं बाढ़

अल नीनो का असर हर जगह एक जैसा नहीं होता। भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में सूखे की स्थिति बन सकती है, जबकि दक्षिण अमेरिका, अमेरिका के कुछ हिस्सों और अफ्रीका के क्षेत्रों में भारी बारिश हो सकती है। ऐसे में विशेषज्ञों ने सरकारों को पहले से तैयारी करने, जल प्रबंधन मजबूत करने और कृषि रणनीतियों में बदलाव की सलाह दी है, ताकि संभावित संकट का सामना किया जा सके।

Tags :

#मौसम विभाग

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