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नई दिल्ली: कर्नाटक सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार और BJP-RSS पर तीखा हमला बोला है। रविवार को मीडिया से बातचीत में खरगे ने आरोप लगाया कि यह कोई साधारण गलती नहीं बल्कि छात्रों के भविष्य को बर्बाद करने की सुनियोजित साजिश है। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये के इस कथित खेल में BJP और RSS से जुड़े लोग शामिल हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
खरगे ने कहा कि NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक से करीब 22 लाख छात्र प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों तक दिन-रात मेहनत करने वाले छात्रों का भविष्य पैसों के लिए बेच दिया गया। उन्होंने कहा कि कई छात्र मानसिक तनाव में हैं और कुछ ने आत्महत्या तक कर ली है। खरगे ने सवाल उठाया कि आखिर इन मौतों और छात्रों के टूटते मनोबल की जिम्मेदारी कौन लेगा।
कर्नाटक मंत्री नेकेंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधानपर भी निशाना साधते हुए कहा कि अगर BJP में थोड़ी भी शर्म बची है तो उन्हें तुरंत मंत्रिमंडल से हटाया जाए या फिर वे खुद इस्तीफा दें। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बातों पर विपक्ष से इस्तीफे मांगने वाले BJP नेता अब इस बड़े शिक्षा घोटाले पर चुप क्यों हैं।
खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री अक्सर‘परीक्षा पे चर्चा’की बात करते हैं, लेकिन अब NEET परीक्षा विवाद पर चर्चा क्यों नहीं कर रहे। खरगे ने कहा कि युवाओं के हितों की बात करने वाली सरकार को अब छात्रों के गुस्से और दर्द का जवाब देना चाहिए।
इस बीच मामले की जांच कर रही CBI ने रविवार को आरोपी मनीषा गुरुनाथ मंधारे को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया। CBI ने कोर्ट से 14 दिन की हिरासत मांगी और कहा कि NTA की पूरी परीक्षा प्रक्रिया जांच के दायरे में है। एजेंसी का दावा है कि आरोपी ने छात्रों से पैसे लिए थे, जिसकी जांच की जा रही है।
मनीषा मंधारे पुणे की एक वरिष्ठ बॉटनी टीचर हैं औरNTA पैनल में एक्सपर्टऔर ट्रांसलेटर के तौर पर काम कर चुकी हैं। CBI ने उन्हें मथुरा के एक होटल से हिरासत में लिया था। पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। बचाव पक्ष ने कोर्ट में दावा किया कि आरोपी के घर से कोई बरामदगी नहीं हुई और वह पहले भी जांच में सहयोग कर चुकी हैं।
पेपर लीक विवाद बढ़ने के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने कई वरिष्ठ अधिकारियों की नई नियुक्तियां की हैं। वहीं, नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली स्थित NTA कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और एजेंसी पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। पूरे मामले ने देशभर के छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है।
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