Mon, 29 Jun 2026
Logo

ब्रेकिंग

दिल्ली के अस्पताल से फरार अंडरट्रायल 48 घंटे में गिरफ्तार, बीमारी का बहाना बनाकर हुआ था गायब ; हिमाचल से पकड़ाया

पुरी में देवस्नान पूर्णिमा की धूम: मुख्यमंत्री मोहन माझी समेत हजारों श्रद्धालुओं ने किए महाप्रभु के दर्शन

बेटियों की शादी में मददगार साबित हो रही मुख्यमंत्री विवाह शगुन योजना, पात्र परिवारों को मिल रही 71 हजार रुपये तक की सहाय

सोशल मीडिया पर सिख गुरु साहिबान के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला, लुधियाना में पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे निहंग सि

हत्या या कुछ और : लापता बुजुर्ग की संदिग्ध परिस्थितियों में मिली लाश, परिजनों ने की निष्पक्ष जांच की मांग

दिल्ली में नई ईवी पॉलिसी 1 जुलाई से लागू होगी, सीएम रेखा गुप्ता ने किया ऐलान, जानें क्या होंगे बड़े बदलाव

CM साय का बड़ा ऐलान: बिजली उपभोक्ताओं को बकाया बिल जमा करने दी गई 3 महीने की अतिरिक्त मोहलत, सरचार्ज पूरी तरह माफ

बिलासपुर सेंट्रल जेल के बंदी की मौत, नहाने के दौरान गिरने से सिर पर आई गंभीर चोट

दिल्ली में MCD टोल टैक्स नियमों में बदलाव की तैयारी, कमर्शियल वाहनों पर हर साल 5% बढ़ोतरी का प्रस्ताव

मोदी कैबिनेट विस्तार की चर्चा तेज: MP से 1 और सांसद बनेंगे केंद्र में मंत्री! रेस में सबसे आगे तरुण चुघ का नाम

सूचना

: केरल के वायनाड में क्यों आई तबाही-भीषण भूस्खलन के बाद अब तक 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है

Admin / Tue, Jul 30, 2024 / Post views : 310

Share:
ABN EXPRESS NEWS 24x7
केरल के वायनाड जिले में मेप्पाडी के पास पहाड़ी इलाकों में मंगलवार सुबह हुए भीषण भूस्खलन के बाद अब तक 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं. ऐसे में सवाल है कि केरल के वायनाड जैसे हरे-भरे इलाके में भूस्खलन जैसी आपदा कैसे आ गई. आइए जानते हैं कि इसका पश्चिमी घाट (वेस्टर्न घाट) से क्या कनेक्शन है.
केरल में भारी बारिश कहर बन गई है. वायनाड जिले में मेप्पाडी के पास पहाड़ी इलाकों में मंगलवार सुबह हुए भीषण भूस्खलन के बाद अब तक 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं. फंसे हुए लोगों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन तेजी से चलाया जा रहा है. इस बीच कई लोगों के मन में सवाल है कि केरल के वायनाड जैसे हरे-भरे इलाके में भूस्खलन जैसी आपदा कैसे आ गई. दरअसल, यहां का इको-सिस्टम काफी नाजुक है. इसलिए प्रशासन ने इसे इको-सेंसिटिव एरिया (ESA) टैग भी दिया हो. हरा-भरा स्वर्ग कहे जाने वाला वायनाड, पश्चिमी घाट (वेस्टर्न घाट) के पहाड़ों के बीच बसा है. वेस्टर्न घाट, भारत के पश्चिमी तट पर स्थित पर्वत श्रृंखला है. यह छह राज्यों से गुजरती है- केरल, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु. इसकी कुल लंबाई तकरीबन 1600 किमी है. इसकी कुल लंबाई का लगभग 40% हिस्सा केरल में पड़ता है.
केरल में इतनी ज्यादा प्राकृतिक आपदाएं क्यों आती हैं?
प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर केरल अपनी जियोग्राफी की वजह से प्राकृतिक आपदा का शिकार बनता है. केरल सरकार की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार समुद्री तट और पश्चिमी घाट की ढलानों के करीब होने की वजह से राज्य प्राकृतिक आपदाओं के मामले में काफी संवेदनशील है. समुद्री तट के पास होने से यहां बाढ़ सबसे आम प्राकृतिक खतर है. रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 14 फीसदी हिस्से में बाढ़ आने का खतरा ज्यादा है. कुछ इलाकों में यह आंकड़ा 50 फीसदी तक है. राज्य को चक्रवाती तूफान से भी खतरा है. यहां बिजली गिरने की भी बड़ी मात्रा में घटनाएं दर्ज की गईं हैं, खासतौर पर अप्रैल, मई, अक्टूबर के महीनों में.

वायनाड में क्यों हुआ भूस्खलन?

केरल में भूस्खलन की सबसे बड़ी वजह उसका वेस्टर्न घाट के नजदीक होना है. वायनाड में हुए लैंडस्लाइट की वजह भी यही बताई जा रही है. एक आंकड़े के मुताबिक, पश्चिमी घाट का 1500 स्क्वायर किमोमीटर एरिया पर भूस्खलन एक बड़ा खतरा रहता है. इसमें वायनाड समेत कोझिकोड, इडुक्की और कोट्टायम जिले शामिल हैं. पश्चिम घाटों में लगभग 8% क्षेत्र की पहचान भूस्खलन से खतरों के रूप में हुई है. पश्चिमी घाट में तीव्र ढलान है और मानसून के मौसम के दौरान भारी बारिश होने से मिट्टी सेचुरेट हो जाती है. सेचुरेट मिट्टी वो होती है जो और ज्यादा लिक्विड को एब्जॉर्ब नहीं कर सकती. इसलिए, बारिश के मौसम में लैंडस्लाइड के मामले और बढ़ जाते हैं. केरल में भूस्खलन होने के पीछे और भी तमाम फैक्टर हैं- स्लोप फेलर (जब मिट्टी, चट्टान और मलबा किसी ढलान से अचानक विनाशकारी तरीके से नीचे की ओर गिरता है), भारी बारिश, मिट्टी की गहराई, भूकंप, बिजली की गड़गड़ाहट और इंसानी गतिविधियां. इन मैन मेड फैक्टर्स में ढलान के सिरे पर खुदाई, जंगलों की कटाई और खनन शामिल है. हालांकि, भूस्खलन का ट्रिगरिंग फैक्टर बरसात बताई जाती है.
2018 के लैंडस्लाइड में कितना नुकसान हुआ?
चूंकि केरल घनी आबादी वाला राज्य (प्रति वर्ग किलोमीटर 860 व्यक्ति) है, इसलिए यहां आपदाओं के कारण होने भारी नुकसान होता है. 2018 की तिमाही में केरल में 5000 से ज्यादा बड़े-छोटे भूस्खलन रिपोर्ट हुए थे. उस साल जून-अगस्त के दौरान बाढ़ के मौसम में अकेले इडुक्की और वायनाड जिलों में 3000 से ज्यादा भूस्खलन की घटनाएं हुईं थी. केवल भूस्खलन से मरने वालों की संख्या 155 थी. इमारतों और इंफ्रास्ट्रक्चर में अनुमानित 40,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ. ऊपर से राज्य में, खासतौर पर वायनाड जिले में हजारों हेक्टेयर उपजाऊ भूमि बर्बाद हो गई.
क्या होते हैं इको-सेंसिटिव एरिया (ESA)?
वेस्टर्न घाट में नेशनल पार्क और वाइल्डलाइफ सेंचुरी समेत कुल 39 संपत्तियां आती हैं, जो विश्व धरोहर स्थलों के रूप में नामित हैं. इनमें से अकेले केरल में 20 संपत्ति हैं. ESA का टैग इन नाजुक इको-सिस्टम को बचाने का तरीका है. इको-सेंसिटिव एरिया संरक्षित क्षेत्रों, नेशनल पार्क और वाइल्डलाइफ सेंचुरी के आसपास का करीब 10 किलोमीटर होता हैं. ESA वाले इलाके में अंधाधुंध इंडस्ट्रियलाइजेशन, माइनिंग और अनियमित विकास पर कड़ी नजर रहती है. इको-सेंसिटिव एरिया का टैग पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से दिया जाता है. सबसे पहले माधव गाडगिल की अध्यक्षता वाली एक समिति, जिसे वेस्टर्न घाट इकॉलॉजी एक्सपर्ट पैनल (WGEEP) के नाम से भी जाना जाता है, ने 2011 में सिफारिश की थी कि सभी पश्चिमी घाटों को इको-सेंसिटिव एरिया (ESA) घोषित किया जाए और केवल कुछ क्षेत्रों में ही सीमित विकास की अनुमति दी जाए. इसके बाद 2013 में एक और पैनल का गठन हुआ, जिसमें केवल 37% एरिया को ही ESA के दायरे में रखा जाना चाहिए.

Tags :

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

जरूरी खबरें

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

Related Posts