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ABN NEWS:- नई दिल्ली : आत्मसमर्पण नहीं; अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच कांग्रेस पार्टी के दो नेता आमने-सामने....

Abhyuday Bharat News / Thu, Mar 12, 2026 / Post views : 149

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अमेरिका-ईरान युद्ध की आंच भारत के विपक्ष तक भी पहुंच गई है। कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेता ईरान युद्ध पर एक टिप्पणी को लेकर खुले पत्रों के जरिए एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। पहले मणिशंकर अय्यर ने शशि थरूर की विदेश नीति वाली टिप्पणी पर सवाल उठाए तो वहीं अब जवाब शशि थरूर की ओर से भी आया है।

नई दिल्ली: ईरान जंग के बीच एक ओर जहां कांग्रेस पार्टी सरकार की विदेश नीति पर सवाल खड़े कर रही है तो वहीं दूसरी ओर विदेश नीति के ही मसले पर पार्टी के दो नेता आमने-सामने हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर को कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अब तगड़ा जवाब दिया है। हालांकि कांग्रेस के कुछ नेताओं की ओर से कुछ समय पहले ही कहा गया कि मणिशंकर अय्यर अब पार्टी का हिस्सा नहीं है। इन सबके बीच लगातार उनकी ओर से पार्टी के अलग-अलग नेताओं पर उनका हमला जारी है। हाल ही में मणिशंकर अय्यर ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर की विदेश नीति पर टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए एक खुला पत्र लिखा था। यह पत्र फ्रंटलाइन मैगजीन में छपा। अब इसी मुद्दे पर शशि थरूर ने करारा जवाब दिया है।

कांग्रेस के लोकसभा सांसद शशि थरूर ने मणिशंकर अय्यर को संबोधित करते हुए एक पोस्ट लिखा है। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा है कि अय्यर जी, लोकतंत्र की खूबी यही है कि लोग अलग-अलग राय रख सकते हैं। इसमें असहमति होना गलत नहीं है। लेकिन सिर्फ इसलिए कि कोई विदेश नीति को थोड़ा अलग तरीके से देखता है, उसकी नीयत या देशभक्ति पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। आपने मेरे विचारों और मेरे चरित्र के बारे में जो सार्वजनिक टिप्पणी की है, उसका जवाब देना जरूरी हो गया है।

शशि थरूर ने आगे लिखा कि मैंने हमेशा अंतरराष्ट्रीय मामलों को भारत के राष्ट्रीय हित के नजरिए से देखा है। मेरे लिए भारत की सुरक्षा, भारत की अर्थव्यवस्था और दुनिया में भारत की इज्जत सबसे ऊपर है। दुनिया की राजनीतिक हकीकत को समझना और भारत के हितों को ध्यान में रखकर फैसला लेना कोई 'मोरल सरेंडर' नहीं है — यह जिम्मेदार स्टेटक्राफ्ट है।

उन्होंने आगे लिखा कि देशभक्ति पर किसी एक पीढ़ी का अधिकार नहीं है। और न ही गांधी जी या नेहरू जी को समझने का अधिकार किसी एक समूह के पास है। असली सम्मान यही है कि उनके विचारों को आज के समय की हकीकत के साथ समझकर लागू किया जाए। इतिहास में भी भारत ने कई बार ऐसा किया है कि किसी देश की गलत कार्रवाई को तुरंत सार्वजनिक रूप से नहीं ललकारा, क्योंकि हमारे अपने राष्ट्रीय हित उससे जुड़े हुए थे। उदाहरण के लिए, सोवियत यूनियन के साथ हमारे रिश्ते इतने महत्वपूर्ण थे कि हंगरी, चेकोस्लोवाकिया और अफगानिस्तान के मामलों में भी भारत ने बहुत संतुलित रुख अपनाया।

शशि थरूर ने आगे लिखा कि अपने हाल के Indian Express लेख में मैंने साफ लिखा है कि यह युद्ध अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है, इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं और इसे तुरंत खत्म होना चाहिए। लेकिन साथ ही मैंने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ हमारे कई महत्वपूर्ण हित जुड़े हैं, उन्हें खतरे में डालना समझदारी नहीं होगी। विदेश नीति आखिरकार राष्ट्रीय हित के बारे में ही होती है, केवल भाषण देने या दिखावे की राजनीति करने के बारे में नहीं।

कांग्रेस सांसद ने लिखा कि मेरी विदेश यात्राओं को लेकर जो आरोप लगाए गए हैं, वे बिल्कुल बेबुनियाद हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब हमने दुनिया में भारत का पक्ष रखा, तो मेरा संदेश साफ था। भारत बुद्ध और गांधी की भूमि है। हम शांति चाहते हैं। लेकिन शांति का मतलब कमजोरी नहीं होता। अगर आतंकवाद हमारे लोगों की जान लेगा, तो भारत मजबूती से जवाब देगा। सबरीमाला के मुद्दे पर भी आपकी आलोचना मुझे थोड़ी अजीब लगी। एक तरफ आप मुझे गलत विचारों के लिए कोसते हैं, दूसरी तरफ उसी मुद्दे पर पार्टी के निर्णय के साथ खड़े होने के लिए भी आलोचना करते हैं।

मेरी जन्मतिथि को लेकर की गई टिप्पणी भी इस बहस से जुड़ी नहीं है। महात्मा गांधी का सम्मान करने के लिए यह जरूरी नहीं कि किसी को उनकी गोद में खेलने का मौका मिला हो। मैंने गांधी जी और नेहरू जी पर काफी लिखा है और उनका सम्मान मेरे विचारों में गहराई से मौजूद है। आपने कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में मेरा समर्थन किया, उसके लिए मैं आपका आभारी हूं।और जब आपको पार्टी से निलंबित किया गया था, तब मैंने भी आपके समर्थन में आवाज उठाई थी। मुझे खुशी है कि वह निर्णय बाद में ठीक किया गया। आपकी हाल की टिप्पणियों के बाद जवाब देना जरूरी हो गया, इसलिए दे रहा हूं।

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