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रिपोर्टों में कहा गया है कि बातचीत के लिए किए जा रहे पाकिस्तान के सभी प्रयास से ईरान ने खुद को दूर रखा है। तेहरान ने अमेरिका के साथ किसी भी समझौते में गारंटी की मांग कर रहा है। जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर वली नस्र का कहना है कि ऐसी रिपोर्ट हैं कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री इस संभावित समझौते के लिए एक गारंटर की तलाश में चीन जा रहे हैं। पूरी संभावना है कि अमेरिका के साथ बातचीत के लिए ईरान की यही शर्त है।
नस्र ने एक्स पर अपने आकलन में लिखा कि पाकिस्तानी विदेश मंत्री गारंटी के विचार को वॉशिंगटन और बीजिंग के सामने रखे बिना चीन नहीं जा रहे होंगे। हालांकि, इस बात की गारंटी नहीं है कि चीन इस प्रस्ताव को स्वीकार करेगा लेकिन कूटनीतिक प्रयासों में बीजिंग सबसे आगे है।
चीन ने बातचीत में ईरान को शामिल करने के प्रयास का समर्थन किया है। पिछले सप्ताह ही इशाक डार ने अपने चीनी समकक्ष से बात की थी, जिसमें वांग ने पाकिस्तान की भूमिका की तारीफ की थी। इसके साथ ही ईरान से बातचीत की प्रक्रिया में शामिल होने का आग्रह किया था।
चीन को इसलिए लाया गया है क्योंकि ईरान अगर किसी की सुनेगा तो वह चीन ही है। चीन के विदेश मंत्रालय ने वीकेंड पर ईरान के विदेश मंत्री को फोन किया था और उन्हें इस्लामाबाद के बातचीत के प्रयास में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया था। चीन ने पाकिस्तान को भी समर्थन दिया है।
रउफ कलासरा, पाकिस्तानी पत्रकार
पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार रउफ कलासरा ने इशाक डार के चीन दौरे को अहम बताया है। क्लासरा ने कहा कि ईरान इस समय अगर किसी ताकत पर भरोसा कर सकता है तो वह चीन ही है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से उन्होंने बताया कि वर्तमान स्थिति में चीन ही ईरान को बातचीत के लिए गारंटी दे सकता है, जिस पर तेहरान भरोसा करे। चीन जो असर ईरान में रखता है, वह पाकिस्तान का नहीं है।
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