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ABN NEWS :- देश दुनिया : ईरान का 'महाविनाशक' अवतार, मिसाइलों में अब एक-एक टन के बम लगाकर कर रहा हमले, कितना खतरनाक नया प्लान?

Abhyuday Bharat News / Tue, Mar 10, 2026 / Post views : 89

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ऐसी संभावना है कि खोर्रमशहर-4 जैसी एडवांस्ड बैलिस्टिक मिसाइलों में एक टन के वॉरहेड लगाया जा रहा है या लगाया जा सकता है। यह सिस्टम मीडियम-रेंज रीच के साथ हाई पेलोड क्षमता देता है जिसकी वजह से ये मिसाइल अत्यंत घातक हो जाती है।

तेहरान: ईरान ने आधिकारिक तौर पर अपनी मिसाइलों में एक-एक टन के वॉरहेड लगाकर दुश्मनों पर हमले शुरू कपर दिए हैं। ईरान का ये बहुत ही ज्यादा घातक युद्ध का प्लान है क्योंकि इससे बहुत ही ज्यादा तबाही मचने की आशंका बन गई है। मिसाइलों में एक-एक टन के वॉरहेड लगाने की ये घोषणा IRGC एयरोस्पेस कमांडर जनरल मौसवी ने की है। इसके अलावा उन्होंने बहुत ज्यादा असर करने वाले स्ट्राइक और सैचुरेशन अटैक स्ट्रेटेजी को लेकर ईरान की नीति में आए बड़े बदलाव की जानकारी दी है।

उन्होंने इसके पीछे का मकसद बताते हुए कहा है कि इसे क्षेत्रीय एयर डिफेंस सिस्टम को बेअसर करने के लिए डिजाइन किया गया है। शीर्ष इंटेलिजेंस सूत्रों के हवाले से न्यूज 18 ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि तेहरान ने मिक्स्ड पेलोड मिसाइल के इस्तेमाल से हटकर एक टन से ज्यादा भारी वॉरहेड को स्टैंडर्ड बनाने की तरफ कदम बढ़ा दिया है। इसका मकसद दुश्मन के खेमे में ज्यादा से ज्यादा तबाही मचाना है।

इजरायल में संवेदनशील इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमला करने का प्लान?

बहुत आसान भाषा में समझिए तो एक टन वाले वारहेड के साथ अगर कोई मिसाइल किसी जगह पर गिरती है तो उसका विनाशक प्रभाव होगा। कोई मिलिट्री इन्फ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह से तबाह हो सकता है। माना जा रहा है कि ईरान, इजरायल में एयरबेस, बंकर, बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स हब और कमांड सेंटर पर भीषण हमलों की शुरूआत कर सकता है। ईरान अब सीमित नुकसान पहुंचाने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल कम करने जा रहा है।

ज-18 ने शीर्ष खुफिया सूत्रों के हवाले से कहा है कि एक टन से ज्यादा वजन वाले वॉरहेड ब्लास्ट की क्षमता को काफी ज्यादा बढ़ा देते हैं। इससे मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के तबाह होने की बहुत ज्यादा गारंटी होती है। ईरान अगर वाकई ऐसी मिसाइलों से हमला कर रहा है या करने वाला है तो यकीन मानिए ये युद्ध महाविनाशक स्थिति में पहुंच सकती है। ये मिसाइलें इजरायलऔर मिडिल ईस्ट  में मौजूद अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर अकल्पनीय नुकसान पहुंचा सकती हैं ऐसे में इजरायल और अमेरिका के हमले भी घातक हो सकते हैं।

ईरान की नई मिसाइलें कितनी तबाही मचा सकती हैं?

सामान्य मिसाइलें में करीब 500 किलो तक का वारहेड लगा होता है। लेकिन 1,000 किलो का वॉरहेड कंक्रीट वाले फैसिलीट को सीधे भेदने और मलबे में तब्दील करने की क्षमता रखते हैं। यानि इजरायल के एफ-35 जैसे महंगे विमान जो कंक्रीट के शेल्टर में रखे गये होते हैं वो इन हमलों से राख हो सकते हैं।

  • एयरबेस पर अगर ऐसी मिसाइलों गिरती हैं तो एक-टन का धमाका रनवे पर इतना बड़ा और गहरा गड्ढा बना देता है जिसे भरने में कई दिन लग सकते हैं। एयरबेस बेकार हो सकता है।

  • अगर ऐसी मिसाइल बेस के तेल भंडार या हथियार डिपो पर गिरती हैं इसका 'ब्लास्ट रेडियस' इतना ज्यादा बड़ा होगा कि यह एक 'चेन रिएक्शन' को शुरू कर सकता है। जिससे पूरा बेस जल सकता है।

  • अगर ऐसी मिसाइल से किसी राजनीतिक हस्तियों के आवास या दफ्तर पर हमले किए जाएं और एयर डिफेंस सिस्टम नाकाम हो जाए तो उनका बचना नामुमकिन होगा।

ईरान ने बदली अपनी मिसाइल रणनीति?

ऐसी संभावना है कि खोर्रमशहर-4 जैसी एडवांस्ड बैलिस्टिक मिसाइलों में एक टन के वॉरहेड लगाया जा रहा है या लगाया जा सकता है। यह सिस्टम मीडियम-रेंज रीच के साथ हाई पेलोड क्षमता देता है जिसकी वजह से ये मिसाइल अत्यंत घातक हो जाती है। सूत्रों के हवाले से ABN EXPRESS NEWS ने आगे बताया है कि लॉन्च की बढ़ी हुई फ्रीक्वेंसी और बड़ी मिसाइल वेव से पता चलता है कि डिफेंस-सैचुरेशन टैक्टिक्स अपनाई जा रही हैं, जिन्हें इंटरसेप्टर इन्वेंटरी को खत्म करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका मतलब ये भी है कि ईरान अब इजरायल के आयरन डोम, डेविड स्लिंग्स और एरो सिस्टम को निशाना बनाने जा रहा है।

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