Fri, 15 May 2026
Logo

ब्रेकिंग

छत्तीसगढ़: कोरबा में हाथियों का तांडव, फसलों को भारी नुकसान

अघोषित आपातकाल की ओर बढ़ रहा देश’— जयसिंह अग्रवाल का केंद्र सरकार पर हमला, महंगाई-ईंधन संकट पर उठाए सवाल...

’छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की पुनर्विकास योजनाओं (Re-development) में तेजी, शासन स्तर पर वि

रायपुर : ’इकोनॉमी के विकास के लिए वैल्यू एडिशन आधारित उत्पादन करना होगा -राज्यपाल डेका’

पति पत्‍नी और वो दो' मूवी रिव्‍यू

नमाज नहीं, लंदन से आएगी वाग्देवी की मूर्ति, भोजशाला परिसर मंदिर है, एमपी हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों ने दिल्ली में अमित शाह से की मुलाकात

आज का मौसम 15 मई: अगले 24 घंटे के अंदर 10 राज्यों में तूफानी बारिश का अलर्ट, 70 KM की रफ्तार से चलेगी हवा IMD की चेतावनी

तेल-गैस पर हाहाकार, लंबा खिंच रहा पश्चिम एशिया संकट, रूसी तेल पर छूट बढ़ाए अमेरिका, भारत की मांग

बाकी वसूली किस्तों में की जाएगी, जनता चुकाएगी कीमत; पेट्रोल-डीजल दाम बढ़ने पर भड़के राहुल गांधी

सूचना

: संत रविदास जयंती आज: जानिए उनका जीवन, शिक्षाएं और अमर दोहे

Admin / Wed, Feb 12, 2025 / Post views : 205

Share:

संत रविदास जयंती हर वर्ष माघ पूर्णिमा को मनाया जाता है। संत रविदास एक महान भक्ति संत, समाज सुधारक और कवि थे, जिन्होंने जातिवाद और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई। उनके द्वारा दिया गया प्रेम, एकता और भक्ति का संदेश आज भी लोगों को प्रेरित करता है। संत रविदास का जीवन और उनकी शिक्षाएं हमें समाज में समानता, प्रेम, भक्ति और सादगी का महत्व सिखाती हैं। उनके दोहे आज भी प्रासंगिक हैं और मानवता को सही दिशा दिखाते हैं। संत रविदास जयंती पर हमें उनके संदेशों को आत्मसात कर समाज में सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए।

जन्म और प्रारंभिक जीवन संत रविदास का जन्म 15वीं शताब्दी में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था। वे एक चर्मकार परिवार में जन्मे थे, लेकिन उन्होंने सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर भक्ति मार्ग अपनाया और समाज में समानता का संदेश दिया।

जाति-पाति के विरुद्ध विचार संत रविदास ने समाज में व्याप्त जातिवाद का विरोध किया और मानव मात्र को समान बताया। उनका मानना था कि व्यक्ति की पहचान उसके कर्मों से होती है, न कि उसकी जाति से। भक्ति आंदोलन में योगदान संत रविदास भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों में से एक थे। उन्होंने भक्ति मार्ग को अपनाकर भगवान की भक्ति को सर्वश्रेष्ठ बताया और निष्काम प्रेम तथा सेवा पर बल दिया। गुरु नानक और मीरा बाई से संबंध कहा जाता है कि गुरु नानक देव जी और मीरा बाई सहित कई संतों ने संत रविदास से आध्यात्मिक प्रेरणा ली। मीरा बाई उन्हें अपना गुरु मानती थीं।

संत रविदास की रचनाएं संत रविदास द्वारा रचित अनेक पद और दोहे सिखों के पवित्र ग्रंथ 'गुरु ग्रंथ साहिब' में भी संकलित हैं। उनके दोहे सरल भाषा में गहरे आध्यात्मिक संदेश देते हैं। संत रविदास के पाँच प्रसिद्ध दोहे और उनके अर्थ "मन चंगा तो कठौती में गंगा" अर्थ: यदि मन पवित्र और निर्मल है, तो किसी भी स्थान पर किया गया कार्य पवित्र ही होगा। बाहरी आडंबरों की बजाय आंतरिक शुद्धता अधिक महत्वपूर्ण है।

"जाति-जाति में जाति है, जो केतन के पात। रैदास मानुष नहीं, जो गिनत जाति के साथ।।" अर्थ: जाति-पाति का भेदभाव समाज में कृत्रिम रूप से बनाया गया है। असली इंसान वही है जो जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करता। "ऐसा चाहूँ राज मैं, जहाँ मिले सबन को अन्न। छोट-बड़ो सब सम बसै, रैदास रहै प्रसन्न।।" अर्थ: संत रविदास एक ऐसे समाज की कल्पना करते हैं जहां कोई भुखा न रहे, सब समान हों और किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो।

"कह रैदास खालिक सब, एक राम करिम। रहमान रहीम करीम कह, हिंदू तुरक न भेद।।" अर्थ: ईश्वर सबके लिए एक समान है, चाहे कोई उसे राम कहें या रहीम। हिंदू और मुस्लिम का भेद सिर्फ मानव निर्मित है, ईश्वर के लिए सब समान हैं। "अब कैसे छूटै राम नाम रट लागा। मैं तो राम रतन धन पायो।।" अर्थ: जब एक बार भक्त को राम नाम की लगन लग जाती है, तो वह सांसारिक मोह-माया से मुक्त होकर केवल ईश्वर के प्रेम में लीन हो जाता है।

 

Tags :

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

जरूरी खबरें

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

Related Posts