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Chandra Grahan 2026: : जानिए चंद्र ग्रहण से जुड़े हर सवाल का जवाब, इन 4 राशियों की कुंडली में लग सकता है 'ग्रहण'..

Abhyuday Bharat News / Mon, Mar 2, 2026 / Post views : 245

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मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है। इस साल का यही एक मात्र ऐसा ग्रहण है जो भारत में दिखाई देगा। इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा लाल रंग का नजर आएगा। बता दें इस दृश्य को ब्लड मून के नाम से जाना जाता है। ये नजारा तब देखने को मिलता है जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आ जाता है। इस समय सूर्य की रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल से मुड़कर चंद्रमा तक पहुंचती है, जिससे चंद्रमा लाल या तांबे के रंग का नजर आने लगता है। ये ग्रहण नई दिल्ली, चेन्नई, बेंगलुरु, मुम्बई, कोलकाता, हैदराबाद, पटना समेत भारत के कुछ प्रमुख शहरों में नजर आएगा।

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चंद्र ग्रहण का प्रारंभ और समापन समय 2026 (Chandra Grahan 2026 Start And End Timing)

भारत में चंद्र ग्रहण का प्रारंभ शाम 6 बजकर 26 मिनट पर होगा और समापन शाम 6 बजकर 46 मिनट पर होगा। स्थानीय ग्रहण की अवधि 20 मिनट्स 28 सेकण्ड्स की होगी।

चंद्र ग्रहण का स्पर्श कब होगा 2026 (Chandra Grahan Ka Sparsh Kab Hoga 2026)

चंद्र ग्रहण का पहला स्पर्श दोपहर 3 बजकर 21 मिनट पर होगा और अन्तिम स्पर्श शाम 6 बजकर 46 मिनट पर होगा। खण्डग्रास चंद्र ग्रहण की अवधि 03 घण्टे 25 मिनट्स 17 सेकण्ड्स की होगी।

चंद्र ग्रहण का सूतक कब लगेगा 2026 (Chandra Grahan Sutak Time 2026)

चंद्र ग्रहण का सूतक काल 3 मार्च 2026 की सुबह 9 बजकर 20 मिनट से शुरू होगा और इसका समापन शाम 6 बजकर 46 मिनट पर होगा। वहीं बच्चों, बृद्धों और अस्वस्थ लोगों के लिए सूतक दोपहर 3 बजे से शुरू होगा।

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Chandra Grahan 2026: चंद्र ग्रहण का मेष राशि पर प्रभाव

यह चन्द्रग्रहण आपके पांचवें स्थान पर लगेगा। इस ग्रहण के प्रभाव से आपको शारीरिक रूप से कुछ परेशानी हो सकती है । लिहाजा इस तरह की परेशानियों से बचने के लिये आज आपको- चंद्रग्रहण के बाद जल्दी ही किसी पहाड़ी स्थान की यात्रा करें और ग्रहण के दौरान तेज आवाज में मंत्रो का जाप करें।

कितने बजे शुरू होगा चंद्र ग्रहण?

उन्होंने बताया कि 3 मार्च पूर्णिमा के दिन पूर्ण चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 19 मिनट 7 सेकंड पर प्रारंभ होगा। ग्रहण का मध्यकाल शाम 5 बजकर 03 मिनट 7 सेकंड पर रहेगा तथा मोक्ष सायंकाल 6 बजकर 47 मिनट 6 सेकंड पर होगा। इस प्रकार ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 28 मिनट रहेगी। ग्रहण का प्रतिशत 155.5 होने के कारण चंद्रमा पूर्ण ग्रहण की स्थिति में रहेगा।

1. कब शुरू और कब खत्म होगा चंद्र ग्रहण?

पंचांग के अनुसार चंद्रग्रहण की शुरुआत 03 मार्च 2026 को दोपहर 3:21 मिनट पर होगी और यह शाम 6:46 पर समाप्त हो जाएगा. इस तरह यह चंद्रग्रहण तकरीबन साढ़े तीन घंटे तक रहेगा, जिसका सूतक काल सुबह 6:20 मिनट से लग जाएगा और इस दौरान पूजा-पाठ और शुभ कार्य आदि नहीं किए जा सकेंगे.

2. कहां-कहां दिखेगा चंद्र ग्रहण?

यह चंद्र ग्रहण भारत, एशिया, ऑस्ट्रेलिया एवं अफ्रीका में दिखाई देगा. यह ग्रहण अधिकांश उत्तर एवं दक्षिण अमेरिका तथा प्रशांत महासागर में नहीं दिखाई देगा. जिन स्थानों पर चंद्र ग्रहण नहीं दिखाई देगा वहां पर सूतक मान्य नहीं होगा. 

3. सूतक के नियम क्या होते हैं?

गरुड़ पुराण, स्कन्द पुराण तथा धर्मसिन्धु में ग्रहण से जुड़े नियम बताए गये हैं. जिसे के अनुसार  इसमें भोजन करना, भोजन पकाना, सोना, शुभ कार्य करना, देव प्रतिमा का स्पर्श करना, तेल-मालिश करना, बाल-नाखून काटना, शारीरिक संबंध बनाने जैसे कार्य वर्जित हैं. 

4. ग्रहण के समय क्या करना चाहिए?

हिंदू धर्म से जुड़े शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के दौरान मंत्र का जप अत्यंत ही शुभ माना गया है. ऐसे में इस दौरान व्यक्ति को गायत्री, महामृत्युंजय मंत्र, भगवान विष्णु या भगवान शिव के मंत्र अथवा अपने आराध्य देवी-देवता का ध्यान करते हुए उनका स्मरण और उनके मंत्र का जप करना चाहिए. मान्यता है कि ग्रहण में जप और दान करने से उसका करोड़ गुना फल मिलता है. 5. चंद्र ग्रहण के समय भोजन को लेकर क्या नियम है?

हिंदू मान्यता के अनुसार चंद्र ग्रहण के दौरान न तो भोजन बनाना चाहिए और न ही खाना चाहिए. चंद्र ग्रहण से पहले यदि कुछ भोजन बना हो तो उसमें तुलसी का पत्ता डाल देना चाहिए. ग्रहण के दौरान बच्चे, वृद्ध, रोगी आदि को भोजन करने की छूट होती है. 

6. चंद्र ग्रहण खत्म होने के बाद क्या करें?

चंद्र ग्रहण के खत्म होने के बाद व्यक्ति को स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनने चाहिए और पूरे घर में गंगाजल छिड़कना चाहिए. इसके बाद देवी-देवताओं को स्नान आदि कराने के ​बाद उनका विधि-विधान से पूजा करना चाहिए. साथ ही साथ यथा संभव अन्न और धन आदि का दान करना चाहिए. 

7.चंद्र ग्रहण का क्या देश-दुनिया पर क्या पड़ेगा असर? 

गोचर के आधार पर ज्योतिषी दृष्टि से यह ग्रहण प्रतिकूल प्रभाव राजनीति एवं शासन सत्ता में देखने को मिलेगा. कई जगह पर शासन व्यवस्था में परिवर्तन की आवाज उठेगी. साथ ही  कई तरह के आंदोलन के संकेत भी हैं. ग्रहण कल के ग्रहों की दृष्टि पर नजर डालें यह चंद्र ग्रहण के समय कर्क लग्न उदित हो रहा है. जिसमें अष्टम भाव में बुध सूर्य राहु और मंगल एक साथ बैठे हुए हैं द्वादश स्थान पर वक्री बृहस्पति विराजमान है. नवम् स्थान पर उच्च के शुक्र के साथ शनि विराजमान है.

कर्क लग्न के अनुसार शनि और शुक्र का असंतुलित होकर के मजबूत होना. द्वादश के बृहस्पति का अष्टम भाव में राहु मंगल सूर्य बुध के साथ मूल त्रिकोण का संबंध बनाना. निश्चित तौर पर बाजार क्या संतुलन एवं आर्थिक संकट के संकेत देता है. साथ ही साथ एक बड़े समूह का न्याय के लिए आंदोलन का सूचक बन रहा है. क्योंकि अष्टम भाव में मंगल राहु और सूर्य बुध विद्रोह, खून खराबा एवं राजनीतिक अस्थिरता के संकेत देते हैं. और कहीं ना कहीं विश्व राजनीति में भी खराब संकेत दे रहा है. 

मुख्य रूप से 13 अप्रैल 2026 से 1 मई 2026 के बीच में, 1 जून 2020 से  4 अक्टूबर 2026 के बीच में बहुत राजनीतिक उठा-पटक, सियासी घटनाएं उन्मादी रूप से एक नया विध्वंसक रूप लेते हुए दिखाई देंगे. जो आगे के लिए अच्छा नहीं होगा. विश्व राजनीति में भी मिडिल ईस्ट ओर दक्षिणी एशियाई देशों में भी तनाव की स्थितियां उत्पन्न होती हुई दिखाई दे रही है. विश्व स्तर पर शेयर बाजार में काफी असंतुलन देखने को मिलेगा. उपरोक्त समय में कुछ आपका आतंकी घटनाएं भी घट सकती है. रेल हवाई जहाज दुर्घटनाओं की भी संकेत है. प्रकृति में कुछ उथल-पुथल अथवा भूकंप या प्राकृतिक संतुलन जैसे तूफान आदि देखने को मिल सकता है. उपरोक्त समय में मुख्य रूप से किसी बड़े तूफान की आशंका है. 

8. चंद्र ग्रहण किन राशियों के लिए अशुभ?

राशिफल के दृष्टिकोण से अगर देखा जाए तो मुख्य रूप से मेष राशि, कर्क राशि, सिंह राशि, कुंभ राशि एवं मीन राशि के लोगों को थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है. कर्क राशि वालों को स्वास्थ्य विशेष ध्यान देना चाहिए तथा कुछ संबंधों में तनाव भी हो सकता है आर्थिक चिंताएं परेशान कर सकती हैं. भगवान विष्णु की आराधना करें. 

सिंह राशि वालों को जीवनसाथी से तनाव अथवा जीवनसाथी को लेकर के स्वास्थ्य की चिंता हो सकती है. किसी प्रेम संबंध में भी तनाव के संकेत है. राजनीतकियों के लिए प्रयासरत क्षेत्रों में आरक्षणों का सामना करना पड़ेगा. हनुमान जी की आराधना करें. मंगल के बीज मंत्र का जाप करें. 

मेष राशि वालों के लिए आर्थिक कठिनाइयों को लेकर परेशान हो सकते हैं. रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमजोर होने से भी थोड़ा स्वास्थ्य की दिक्कत हो सकती है. संबंधों में थोड़ा मृदभाषा का प्रयोग करें. भगवान विष्णु की आराधना करें. बृहस्पति के बीज मंत्र का जापकरें. 

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