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Admin / Thu, Sep 5, 2024 / Post views : 240
ABN EXPRESS NEWS 24x7
कांग्रेस के चुनाव अभियान की शुरूआत करते हुए राहुल गांधी ने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य बनाने का वादा किया है.
उन्होंने बुधवार को जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ़्रेंस के अध्यक्ष फ़ारुक़ अब्दुल्लाह के साथ दो जनसभाओं को संबोधित किया.
इस बार जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ़्रेंस, कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और पैंथर्स पार्टी का गठबंधन मिलकर चुनाव लड़ रहा है.
नेशनल कॉन्फ्रेंस 51 सीटों जबकि कांग्रेस 32 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. पाँच सीटों पर दोनों दलों के बीच "फ़्रेंडली फाइट" होने जा रही है. सीट शेयरिंग समझौते के तहत मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के लिए कश्मीर में एक और पैंथर पार्टी के लिए जम्मू में एक सीट छोड़ी गई है.
जानकारों का कहना है कि हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ़्रेंस का गठबंधन कारगर रहा था. मुमकिन है कि विधानसभा चुनावों में भी गठबंधन फायदेमंद साबित हो.
अपने चुनावी भाषणों में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया. राहुल गांधी ने के रामबन में एक रैली में कहा, "आज जम्मू -कश्मीर में राजा बैठा हुआ है उसका नाम एलजी है, लेकिन है वो राजा है."
उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वो राज्य के बाहर के लोगों का फ़ायदा कर रही है. कश्मीर के में भी राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बीजेपी और आरएसएस मीडिया, अफ़सरशाही और दूसरी संस्थाओं पर क़ब्ज़ा कर रहे हैं.
लेकिन बीजेपी कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ़्रेंस के बीच हुए गठबंधन को मौक़ापरस्ती बता रही है.
जम्मू कश्मीर में बीजेपी के प्रवक्ता जीएल रैना ने कहा, “ ये साफ़ है कि ये मौक़ापरस्ती का गठबंधन है. 1984 में जब कांग्रेस ने फ़ारुक़ अब्दुल्लाह की सरकार को डिसमिस किया था, तब इन लोगों ने एक-दूसरे के ख़िलाफ़ क्या-क्या कहा था. ये लोगों को याद है. अभी केवल मोदी जी से नफ़रत और सत्ता पाने के लिए गठबंधन किया है.”
जम्मू-कश्मीर में आख़िरी बार साल 2014 में विधानसभा चुनाव हुए थे. उस समय पीडीपी और बीजेपी ने गठबंधन सरकार बनाई थी. साल 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर के इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया.
आख़िरी बार साल कांग्रेस की ओर से ग़ुलाम नबी आज़ाद राज्य के सीएम बने थे. बदले सियासी हालात में क्या कांग्रेस एक बार फिर राज्य में वापसी कर सकती है?

अनंतनाग में एक रैली के दौरान राहुल गांधी और फ़ारुक़ अब्दुल्लाह
साल 2014 में कांग्रेस पार्टी को जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव में कुल 12 सीटें मिली थीं. 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को जम्मू-कश्मीर में एक भी सीट नहीं मिली थी, लेकिन पार्टी का वोट प्रतिशत जम्मू क्षेत्र में बढ़ गया है.
कांग्रेस का असल मुक़ाबला और चुनौती जम्मू क्षेत्र में है जहां बीजेपी ने 2014 के विधानसभा चुनाव में 25 सीटें जीती थीं.
वहीं दूसरी ओर कश्मीर घाटी में कांग्रेस के लिए कोई बड़ी उम्मीद नहीं दिखती, फिर भी पार्टी कुछ सीटों पर जीत पा सकती है.
साल 2009 तक जम्मू -कश्मीर में कांग्रेस पार्टी की अच्छी ख़ासी मौजूदगी रही है. उसके बाद से क्षेत्र में कांग्रेस का असर आहिस्ता -आहिस्ता कम होता गया.
आज भी कश्मीर घाटी में कांग्रेस को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. बीते दो दशकों से जम्मू-कश्मीर के सियासी नक़्शे पर कई दूसरे राजनीतिक दल उभर आये, जिससे कांग्रेस को कश्मीर में मुश्किलों का सामना करना पड़ा. इन नए सियासी दलों में खासकर पीडीपी यानी पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी का उभरना था.
पीडीपी के उभार और बीजेपी की हिंदुत्व की राजनीति के कारण जम्मू में कांग्रेस कमज़ोर होती गई. पार्टी को अब नए सिरे से जम्मू-कश्मीर में अपनी सियासी वापसी का प्रयास कर रही है.
विश्लेषक कहते हैं कि कांग्रेस शायद इस बार उभरने का एक मौका मिला है.
जम्मू यूनिवर्सिटी की राजनीति विज्ञान की पूर्व प्रोफेसर डॉक्टर रेखा चौधरी कहती हैं, "इस बार कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस का जो चुनावी गठबंधन हुआ है, उससे कांग्रेस की उम्मीदें बढ़ गई हैं और उन्हें एक सियासी एडवांटेज नज़र आ रहा है."
वर्ष 2019 में केंद्र सरकार ने जम्मू -कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म कर राज्य को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश में बाँट कर लद्दाख को भी एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया था.
विशेष दर्जा ख़त्म करने की बाद जम्मू-कश्मीर एक लम्बे समय तक बंद रहा था और इंटरनेट सेवाओं पर भी प्रतिबंध लगाया गया था. इसके बाद जम्मू -कश्मीर के अधिकांश राजनीतिक दल स्टेटहुड को वापस करने की लगातार मांग कर रहे हैं. बीजेपी ने भी स्टेटहुड का दर्जा वापस देने की बात की है.
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