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तीनों सेनाओं के लिए यह पॉलिसी एआई इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ हेडक्वार्टर ने तैयार की है। इसमें सशस्त्र सेनाओं के लिए एआई के इस्तेमाल की जाने वाली क्षेत्रों की पहचान की गई है और साथ ही साथ इसके लिए उद्योग और शिक्षा जगत में तालमेल बिठाने की भी बात है, ताकि उचित मानवीय दखल के साथ मैदान-ए-जंग में सशस्त्र सेनाओं के लिए अपनी बढ़त बनाए रखना आसान हो।
विजिन 2047 के तहत 9 मार्च को घोषित नीति के अनुसार सशस्त्र सेनाएं निकट भविष्य में एक डेडिकेटेड डिफेंस क्लाउड स्थापित करेंगी,जिसमें पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप जरूरी होगी। इसके लिए एकेडमिया को साथ लेकर साझा रिसर्च सेंटर बनाए जाएंगे और देश की सुरक्षा के साथ-साथ इसके कमर्शियलाइजेशन में भी संतुलन बिठाने की पहल की जाएगी।
युद्ध में आर्टिफिशिय इंटेलिजेंस, रोबोट का इस्तेमाल
सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ-साथ ज्यादा जोखिम वाले क्षेत्रों में सैनिकों की जगह रोबोट को उतारने की तैयारी।
अनमैन्ड कॉम्बैट ऑपरेशन पर फोकस।
करीबी युद्ध में ड्रोन झुंड ( drone swarms ) का व्यापक इस्तेमाल।
एआई नीति में एआई साइबर वॉरफेयर का भी जिक्र है। इसमें एआई-संचालित मैलवेयर डिटेक्शन की प्रक्रिया भी शामिल की गई है।
एआई पॉलिसी के तहत सशस्त्र सेनाओं के लिए इंटेलिजेंस, सर्विलांस और टोह लेने की क्षमताओं में भी बदलाव और बेहतरी पर फोकस किया गया है।
इसमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इंफ्रा-रेड इमेजरी, रडार, सोनार, अकूस्टिक और स्पेस-बेस्ड फीड से प्राप्त तस्वीरों को प्राप्त करके, उनके विश्लेषण की क्षमता हासिल की जानी है।
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# International News
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