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बता दें कि तेल के लिए भारत काफी हद तक खाड़ी क्षेत्र पर निर्भर है, जो 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले से शुरू हुए लगातार बढ़ते युद्ध की चपेट में है। इस युद्ध का असर साफ-साफ कच्चे तेल के आयात और निर्यात पर देखा जा रहा है। कच्चे तेल की कीमत में उछाल देखी जा रही है।
ई20 ईंधन मे 80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत इथेनॉल होता है। E20 पेट्रोल का मकसद तेल आयात बिलों को कम करना, कार्बन उत्सर्जन को घटाना और गन्ना किसानों का समर्थन करना है जो मिश्रण के लिए इथेनॉल प्रदान करते हैं। लेकिन भारत ने पिछले साल ई20 की एकसमान आपूर्ति हासिल कर ली थी, लेकिन इसके कारण पिछले कुछ वर्षों में विवाद भी हुए हैं, क्योंकि कई वाहन चालकों ने दावा किया है कि इससे इंजन खराब हो जाते हैं और माइलेज कम हो जाता है, खासकर पुराने वाहनों में।
इस बीच, अखिल भारतीय आसवन संघ (एआईडीए) ने युद्ध के प्रभावों को कम करने के लिए 20 फीसदी से अधिक इथेनॉल मिश्रण की आपूर्ति करने की पेशकश की है। इसने सरकार से इथेनॉल मिश्रण की अनिवार्यता को धीरे-धीरे बढ़ाकर 30% करने की मांग की है।
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