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दिल्ली न्यूज़ : दिल्ली में मजदूरों की आई आफत, गैस नहीं मिलने से फैक्ट्री में शरण लेने के लिए मजबूर; कइयों ने पकड़ी ट्रेन

Abhyuday Bharat News / Tue, Mar 31, 2026 / Post views : 96

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दिल्ली में गैस नहीं मिलने से मजदूरों की परेशानी बढ़ गई है। मदजूर या तो फैक्ट्री में जाने को मजबूर हो रहे हैं, नहीं तो फिर ट्रेन पकड़ने के लिए। छोटे 5 किलो वाले सिलिंडर भरने के 1700 से 1800 रुपये ले रहे हैं। 35 रुपये वाली खाने की थाली अब 90 रुपये की हो गई है।

नई दिल्ली : दिल्ली में गैस की किल्लत की वजह से सबसे अधिक किसी की आफत आई है वह मजदूर वर्ग है। कई मजदूरों को फैक्ट्री में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कुछ जगहों पर यदि गैस भर भी रहा है तो वह 350 रुपये प्रति किलो तक चला गया है। रामनिवास एक प्रवासी मजदूर हैं और नरेला इंडस्ट्रियल एरिया की एक फैक्ट्री में काम करते हैं। यहां मजदूर तबके के लोग अधिक है। उन्होंने बताया कि उनके साथ उनके कमरे पर तीन साथी और रहते है।

Delhi LPG Crisis News

दिल्ली में एलपीजी संकट


14 किलो के सिलिंडर का रेट 3000 से 5000 रुपये तक पहुंचा

किराए के मकान में रहने और मजदूरी करने की वजह से कभी भी गैस कनेक्शन की रजिस्टर कॉपी बनवाने की कोशिश नहीं की, क्योंकि, बाजार में उन्हें 14 किलो का गैस सिलिंडर आम सरकारी रेट से 60 से 100 रुपये अधिक देकर मिल जाता था। लेकिन, अब हालात बहुत कठिन हो गए हैं। 14 किलो के सिलिंडर का रेट 3000 से 5000 रुपये तक पहुंच गया है। वह भी कई बार बाजारों में घूमने के बावजूद नहीं मिल रहा है।

हालांकि, अब अपने किराए के कमरे को छोड़कर फैक्ट्री में ही शरण ले चुके हैं। रामनिवास अकेले नहीं है, नरेला इंडस्ट्रियल एरिया में हजारों की संख्या में ऐसे प्रवासी मजदूर है जो बिना गैस कनेक्शन के गुजारा करते थे, लेकिन अब उन्हें पलायन का डर सताने लगा है।


बंगाल के मालदा के रहने वाले राहुल, ने बताया कि कई बार फैक्ट्री मालिक से भी अपील कर चुके है कि LPG सिलिंडर दिलवा दें लेकिन मालिक भी असमर्थ महसूस कर रहे है। उन्होंने कहा कि सिलिंडर का बंदोबस्त नहीं हुआ उन्हें तो वे अगले महीने तक गांव चले जाएंगे।


350 रुपये प्रति किलो भर रहे सिलिंडर

  • मजदूर वर्ग खुले बाजार से अपना 5 किलोग्राम वाला गैस सिलिंडर 80 से 100 रुपये प्रति किलो की दर से भरवाते थे। अब गैस किल्लत के बीच यह 300 से 350 प्रति किलो तक पहुंच गया है। वो भी अब ज्यादातर जगह नहीं मिल रहा है।

  • समस्तीपुर, बिहार से यहां आकर तेला रिक्शा चला रहे विजय ने बताया कि वह सीलमपुर फाटक के पास वाली कॉलोनी से अपना 5 किलो का सिलिंडर भरवा लेते थे।

  • अब एक सिलिंडर भरवाने के लिए 1800 रुपये देने पड़ रहे है। हमारी इतनी आमदनी नहीं है। हम लोग जिस जगह से खाने की थाली 35 रुपये में खरीदते थे, अब 90 रुपये तक हो गई है।


परिवार को गांव भेजने के सिवाय और कोई रास्ता नहीं

यमुना पुश्ता की झुग्गी बस्ती में परिवार के साथ रह रहे बांदा, यूपी के आसिफ ने बताया कि खाना पकाने का कोई साधन नहीं बचा है। मंडावली की रेलवे कॉलोनी, गली थे, इस महीने की शुरुआत में वह 70 की नं. 3 में काफी दुकाने हैं जहां चोरी-छिपे 1800 रुपये तक में किसी तरह सिलिंडर भरवाया है। अब वहां भी सिलिडर नहीं भर रहा है।


परिवार को गांव भेजने के सिवाय और कोई रास्ता नहीं है। यूपी से आकर सीलमपुर नाला के पास एक कमरे में 5 लोगों के साथ रह रहे दिहाड़ी मजदूर सुरेश बताते है कि हमारी इतनी आमदनी नहीं है कि 1800 या 2000 रुपये में सिलिंडर भरवा सके।


वृद्धाश्रम में फल-ब्रेड से मिटानी पड़ रही भूख

गैस सप्लाई की किल्लत का असर वृद्धाश्रम पर भी दिखने लगा है। साउथ दिल्ली के आसोला, महरौली स्थित 'घरौदा' वृद्धाश्रम में इन दिनों गैस की कमी से रसोई ठप पड़ गया है, जिससे लगभग 42 बुजुर्गों को मजबूरी में फल और ब्रेड खाकर दिन गुजारना पड़ रहा है। आश्रम के ऑनर का दावा है कि पिछले 26 वर्षों से बिना किसी सरकारी या निजी मदद के संचालित इस आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों के लिए यह स्थिति बेहद कष्टदायक बन गई है।


गैस सिलिंडर की कमी से रसोई पड़ गई है ठप

प्रवेश जैन ने बताया कि हमने जो सिलिंडर 28 फरवरी को बुक किया था, वह 3 मार्च को मिल गया था। इसके अलावा एक और सिलिंडर, जो इंडियन ऑयल (IOC) के नाम पर था, वह 11 मार्च को मिला। लेकिन अब समस्या यह है कि दोनों एजेंसियां 35 दिन पूरे होने से पहले नई बुकिंग ही नहीं ले रही है।

ऐसे में हम सिलिंडर बुक भी नहीं कर पा रहे है। जब मेरा मैनेजर 3 मार्च को बुकिंग के लिए बीपीसीएल के डीलर के पास गए, तो उन्हें कहा गया कि आपकी मांग नोट करे ली गई है। बीपीसीएल के क्षेत्रीय प्रबंधक ने भी फोन पर यही जानकारी दी कि खाड़ी युद्ध के कारण 35 दिन से पहले बुकिंग नहीं ली जा रही है। ऐसे में रसोई बंद करनी पड़ी और बुजुर्गों को केवल ब्रेड और फल देकर काम चलाना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि कुछ एजेंट कालाबाजारी करते हुए 3200 रुपये में सिलिंडर देने की बात कर रहे हैं। एक-दो दिन इंतजार करूंगा उसके बाद मजबूरी में बाजार से सिलिंडर खरीदना पड़ेगा। हालांकि यह काम मैं आखिरी विकल्प के रूप में ही करना चाहूंगा।

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