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रियल टाइम में होता है रिकॉर्डपुलिस अफसरों का कहना है कि इमरजेंसी कॉल पर सबसे पहले PCR स्टाफ मौके पर पहुंचता। ऐसे में हालात को पेशेवर तरीके से संभालना बेहद अहम होता है। बॉडी वॉर्न कैमरे रियल टाइम में घटनाओं की रिकॉर्डिंग करते हैं, जिससे सटीक डिजिटल साक्ष्य तैयार होता है। जो जांच, अदालती कार्यवाही या आंतरिक समीक्षा में सहायक साबित हो सकता है।
500 से ज्यादा कैमरे लेने की तैयारी
सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत अभी 88 हैं मौजूद
दूसरे चरण में PCR वैन के लिए डैश बोर्ड कैमरे की योजना
अभी तक 88 बॉडी वॉर्न कैमरे हैं, लेकिन उनकी रिकॉर्डिंग को एक जगह इकट्ठा करने की सुविधा नहीं थी । ये रिकॉर्डिंग संबंधित जिले के कंट्रोल रूम में जमा होंगी।
पुलिस अफसर मानते हैं कि कैमरों की रिकॉर्डिंग से तथ्य साफ होते हैं, विवाद की गुंजाइश कम रहती है और निष्पक्ष आकलन संभव होता है। इन कैमरों के जरिए पुलिसकर्मियों का आचरण भी रिकॉर्ड होगा। किसी पुलिसकर्मी के व्यवहार की शिकायत आती है तो रिकॉर्डिंग के आधार पर वेरिफाई किया जा सकेगा।
पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा के मैनपावर ऑडिट के निर्देश के बाद PCR को 200 अतिरिक्त स्टाफ मिला है। अब एक वैन में तीन पुलिसकर्मियों की तैनाती संभव होगी। हॉटस्पॉट एरिया में प्रभावी कवरेज मिल सकेगा। रात के समय PCR की विजिबिलिटी और मौजूदगी भी बढ़ेगी। PCR यूनिट के पास 857 वैन हैं, जो पहले 802 थी। हाल ही में 55 MPV शामिल की गई है।
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