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ABN NEWS : दिल्ली की सर्दियों की जहरीली हवा में सुपरबग का खतरा, ऐसे बन सकता है जानलेवा

Abhyuday Bharat News / Mon, Jan 5, 2026 / Post views : 221

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दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण लोगों की सेहत के लिए एक बड़ा खतरा बन रहा है।  जेएनयू की स्टडी में पता चला है कि इस प्रदूषित हवा में कई तरह के खतरनाक बैक्टीरिया पनप रहे हैं। हवा में पाए गए कई बैक्टीरिया स्टैफाइलोकोकस समूह के हैं, जो त्वचा संक्रमण, निमोनिया, खून के संक्रमण और अस्पतालों में होने वाली बीमारियों का कारण बन सकते हैं। 

हर साल सर्दियों में दिल्ली में प्रदूषण का लेवल काफी बढ़ जाता है। इस वजह से लोग आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ और बढ़ती खांसी से जूझते हैं।  लेकिन इस बार प्रदूषण के कारण राजधानी में एक सुपरबग का खतरा मंडरा रहा है, जो सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के एक नए अध्ययन में इस गंभीर खतरे की ओर इशारा किया है। शोध के मुताबिक, दिल्ली की जहरीली सर्दी की हवा में एंटीबायोटिक दवाओं पर असर न करने वाले खतरनाक बैक्टीरिया भी मौजूद हैं, जो लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं।

यह अध्ययन Distribution and antibiotic resistance patterns of airborne staphylococci in urban environments of Delhi, India शीर्षक से अंतरराष्ट्रीय जर्नल Nature Scientific Reports (www.nature.com/scientificreports) में प्रकाशित हुआ है। यह शोध जेएनयू के स्कूल ऑफ एनवायरनमेंटल साइंसेज़ के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है।

इन इलाकों में हुई स्टडी

शोधकर्ताओं ने दिल्ली के कई वास्तविक शहरी इलाकों से हवा के नमूने इकट्ठा किए, जिनमें शामिल हैं। भीड़भाड़ वाले बाजार, शहरी झुग्गी बस्तियां, रिहायशी अपार्टमेंट, जेएनयू परिसर स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, इन सभी जगहों पर गर्मी, मानसून और सर्दी तीनों मौसम में घर के अंदर और बाहर की हवा की जांच की गई, ताकि यह समझा जा सके कि बैक्टीरिया और उनकी दवा-प्रतिरोधक क्षमता मौसम के साथ कैसे बदलती है।

अध्ययन में पाया गया कि दिल्ली की हवा में मौजूद बैक्टीरिया की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा तय सुरक्षित सीमा से कहीं अधिक है। कुछ सर्दियों के नमूनों में बैक्टीरिया की मात्रा 16,000 CFU प्रति घन मीटर से भी ज्यादा पाई गई, जो WHO की सीमा से 16 गुना अधिक है। 

ऐसे बन सकता है जानलेवा

शोध में सामने आया कि हवा में पाए गए कई बैक्टीरिया स्टैफाइलोकोकस समूह के हैं, जो त्वचा संक्रमण, निमोनिया, खून के संक्रमण और अस्पतालों में होने वाली बीमारियों का कारण बन सकते हैं.सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह रही कि बड़ी संख्या में बैक्टीरिया मेथिसिलिन रेजिस्टेंट स्टैफाइलोकोकस (MRS) पाए गए यानी ऐसे बैक्टीरिया जिन पर आम एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं करतीं। ऐसे में कई बीमारियों का इलाज न होने का रिस्क रहता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है ।

सर्दियों में खतरा सबसे ज्यादा

शोध के अनुसार, सर्दियों में जब प्रदूषण अपने चरम पर होता है, तब हवा में ऐसे खतरनाक बैक्टीरिया की संख्या सबसे अधिक होती है। वहीं, मानसून के दौरान बारिश के कारण बाहर की हवा में बैक्टीरिया का स्तर कुछ हद तक कम हो जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रदूषित हवा न सिर्फ सांस की बीमारियों का कारण बन रही है, बल्कि अब यह एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) को फैलाने का माध्यम भी बन सकती है। यह दुनिया के सबसे बड़े स्वास्थ्य खतरों में से एक माना जाता है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों के लिए है।

क्या कहते हैं शोधकर्ता

शोधकर्ताओं ने कहा है कि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस अब केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरी वातावरण की हवा में भी फैल चुका है। उन्होंने सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों से अपील की है कि पर्यावरण में AMR की नियमित निगरानी की जाए और इससे निपटने के लिए ठोस और एकीकृत रणनीति बनाई जाए। यह अध्ययन साफ संकेत देता है कि दिल्ली की सर्दियों की हवा सिर्फ प्रदूषण ही नहीं, बल्कि सुपरबग का खतरा भी अपने साथ ला रही है। 

73 प्रतिशत बैक्टीरिया मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (MDR) पाए गए

इनमें मैक्रोलाइड्स, बीटा-लैक्टम, ट्राइमेथोप्रिम, जेंटामाइसिन जैसी आम दवाओं के खिलाफ प्रतिरोध था। जेनेटिक जांच में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जीन (ARGs) की पुष्टि हुई, 36 मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट बैक्टीरिया में से 14 में mecA जीन पाया गया, जो मेथिसिलिन और उससे जुड़ी दवाओं को बेअसर बना देता है । 

ABN EXPRESS NEWS :- by , NAVAL SINGH

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