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उत्तर प्रदेश :- गाजियाबाद न्यूज : इच्छामृत्यु के बाद भी 5 लोगों को जिंदगी देकर जाएंगे हरीश राणा! दुनिया को अलविदा कहेंगे पर रहेंगे अमर...

Abhyuday Bharat News / Thu, Mar 12, 2026 / Post views : 253

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सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु की इजाजत मिलने के बाद 32 साल के हरीश राणा दुनिया से विदा लेंगे, लेकिन जाते-जाते भी पांच लोगों को जिंदगी देकर जा सकते हैं।

गाजियाबाद: 'तीन साल से हम लड़ाई लड़ रहे थे। कौन माता-पिता चाहेंगे कि अपने बेटे को ऐसे विदा करें। लेकिन, हरीश जैसे ना जाने कितने लोग होंगे, जो इसी तरह पड़े होंगे। जनहित में हम तो बस यही चाहते हैं कि उनका भी कल्याण हो।' ये शब्द उस पिता के हैं, जिन्होंने अपने कलेजे के टुकड़े के लिए देश की सर्वोच्च अदालत से इच्छामृत्यु मांगी। एक मां, जो अपने बेटे की देखभाल में पिछले करीब 13 साल से जुटी है, लेकिन जब उम्मीदें टूट गईं तो उन्होंने भी हार मान ली। एक ऐसा बेटा, जिसमें धड़कनें तो हैं, लेकिन जिंदगी नहीं है।

गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा के लिए वो साल 2013 का एक मनहूस दिन था, जब वह चौथी मंजिल से गिरे और फिर कभी ना उठ सके। हरीश उस समय पंजाब यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे और वेटलिफ्टर बनना चाहते थे। लेकिन, एक हादसे ने उनके सारे सपनों को चकनाचूर कर दिया। एक हंसते-खेलते परिवार से सबसे बड़ा बेटा छीन लिया। उसी दिन से हरीश कॉमा में थे और लाइफ सपोर्ट सिस्टम के जरिए जिंदा थे।

सुप्रीम कोर्ट से हरीश राणा कि इच्छामृत्यु की इजाजत मिलने के बाद वह अब 13 साल के दर्द से मुक्त हो पाएंगे। हालांकि, इस दुनिया से विदा लेते हुए भी हरीश पांच लोगों को जिंदगी देकर जा सकते हैं। दरअसल, हरीश के माता-पिता ने उनके अंगदान करने का फैसला लिया है। माता-पिता का कहना है कि उनके बेटे के जो अंग ठीक हैं, उनसे किसी और को जिंदगी मिल सकती है।

पांच लोगों को जीवन दे सकते हैं हरीश

क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट डॉक्टर अरविंद डोगरा ने ABN EXPRESS NEWS ऑनलाइन के साथ बातचीत में बताया कि हरीश राणा के जो अंग सही काम कर रहे हैं, उन्हें डोनेट किया जा सकता है। हरीश का लीवर, किडनी, लंग्स और आंखों का कॉर्निया चार लोगों को नई जिंदगी दे सकते हैं। इसके अलावा, अगर उनके दिल की कंडीशन सही है, तो वह भी एक जीवन बचा सकता है। लेकिन, मेडिकल जांच के बाद ही इन अगों को दान करने पर फैसला लिया जा सकता है।


हरीश राणा के अंग दान किए जा सकते हैं, लेकिन पहले मेडिकल जांच की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। उनके जो अंग सही काम कर रहे हैं, उन्हें डोनेट किया जा सकता है।                                     

 डॉ. अरविंद डोगरा, क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट, गाजियाबाद       


हरीश राणा की कहानी क्या है?

वो साल 2013 था, जब पंजाब यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हरीश राणा चंडीगढ़ में अपने पीजी में थे। रक्षाबंधन के अगले दिन हरीश फोन पर अपनी बहन से बात कर रहे थे कि अचानक पीजी की चौथी मंजिल से नीचे गिर पड़े और उनके सिर में गहरी चोट आई। इस हादसे के बाद उनकी जिंदगी ने एक मनहूस मोड़ लिया। हरीश कॉमा में चले गए और फिर कभी ना उठ सके।

हरीश के लिए परिवार ने सबकुछ किया

हादसे के बाद हरीश राणा कॉमा में चले गए और परिवार को उनके इलाज के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हरीश के माता - पिता को दिल्ली का अपना तीन मंजिला मकान बेचना पड़ा। परिचितों और जान-पहचान के लोगों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाए, लेकिन उनके पिता ने मना कर दिया। आस-पड़ोस के लोग बताते हैं कि हरीश के पिता ने पूरी खुद्दारी के साथ अपने बेटे के लिए जो हो सकता था, सबकुछ किया।

हरीश राणा के 13 साल के दर्द का अंत

पीजी की चौथी मंजिल से गिरने के बाद हरीश को इलाज के लिए चंडीगड़ पीजीआई में भर्ती कराया गया। तीन महीने बाद भी जब उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ, तो दिल्ली के लोकनायक जयप्रकाश नारायण हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। हरीश को क्वाड्रिप्लेजिया बताया गया, जिसमें उनके अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। जब बेटे के ठीक होने की उम्मीद नहीं बची, तो परिवार ने अपने कलेजे के टुकड़े की इच्छामृत्यु के लिए कोर्ट में गुहार लगाई। और आखिरकार, कोर्ट ने हरीश को इच्छामृत्यु की इजाजत दे दी।

Tags :

#uttarpradesh

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