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देश दुनिया :- खास खबर : 914 करोड़ का सोना हाथ लगा...गांव में एक मजदूर को गड्ढा खोदते-खोदते मिल गया 700 किलो गोल्ड

Abhyuday Bharat News / Thu, Dec 4, 2025 / Post views : 182

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914 करोड़ का सोना हाथ लगा...गांव में एक मजदूर को गड्ढा खोदते-खोदते मिल गया 700 किलो गोल्ड                                          सात समंदर पार भारत का एक दोस्त है। हरे-भरे जंगलों और दुनिया भर की वाइल्ड लाइफ के लिए मशहूर इस देश के एक छोटे से गांव में विशाल खजाना मिला है।                                                          भारत का एक दोस्त है, जो दुनिया के दूसरे छोर पर स्थित है। यह दक्षिण अमेरिकी देश अपने खूबसूरत जंगलों और तरह-तरह के जीवों के लिए मशहूर है। इसका नाम है-ब्राजील। इस देश के एक छोटे से गांव में बहुत बड़ा खजाना मिला है, जिससे माना जा रहा है कि यह दुनिया की बड़ी ताकत बन सकता है। हालांकि, इस खजाने के चक्कर में ब्राजील का प्राकृतिक माहौल बेहद खराब हो रहा है। जानते हैं एक मजदूर की अनोखी कहानी।                                                                                                                                                                                                                       पारे का बेतहाशा इस्तेमाल नष्ट कर रहा जंगल

diamonddetailsmcr.co.uk पर छपी एक स्टोरी के अनुसार, ब्राजील के पारा राज्य के एक गांव में सेरा पेलाडा स्वर्ण खदान बेहद मशहूर है। यहां दोहन करने के लिए सोने को अलग किया जाता है। इस काम में जमकर पारे का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं।                      

                                                                                              गंभीर चुनौती का सामना कर रही है सेरा पेलाडा खदान

diamonddetailsmcr.co.uk के मुताबिक, ब्राजील के इतिहास में सबसे बड़ी खुले गड्ढे वाली कारीगरी वाली उत्खनन परियोजना सेरा पेलाडा स्वर्ण खदान पहले की तरह अपनी गतिविधियों को फिर से शुरू करने में गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। खनिकों के बीच विवाद, भारी कर्ज और पर्यावरणीय जरूरतें इस इच्छा की पूर्ति को जटिल बनाती हैं। अमेजन के इस छोटे से गांव में सोने की होड़ की झलक बहुत कम देखने को मिलती है, जहां समुदाय खनन पर अपना भविष्य दांव पर लगा रहा है। एक खनिक मजदूर चिको ओसोरियो ने ईएफई को बताया-हम सोने से तीन मीटर की दूरी पर हैं। वह उस गुप्त गड्ढे के प्रवेश द्वार को देख रहे थे जिसे उन्होंने पुरानी खदान के पास कुछ श्रमिकों की मदद से खोदा था।                                                                                                        रेडियो पर सुनने के बाद खदान पहुंचे थे

ओसोरियो को सेरा पेलाडा का जीवंत इतिहास माना जाता है, जहां वे 1982 में रेडियो पर इस खोज के बारे में सुनने के बाद पहुंचे थे। उस समय हजारों लोग खदान की दीवारों में सोना ढूंढ़ रहे थे। वे फावड़े-फावड़े चलाकर 50 किलो तक पत्थर से थैलियां भरते थे। उन सीढ़ियों पर चढ़ते थे जिन्हें वे खतरे के कारण 'अदियोस ममिता' कहते थे। और कुछ चमकदार पत्थर मिलने की उम्मीद में कोल्हू की ओर जाते थे।                                                                                                                                                         गड्ढा खोदते-खोदते मिल गया 700 किलो सोना

आज, पुरानी खदान का 150 मीटर से भी ज्यादा गहरा गड्ढा पानी से भरा हुआ है और एक शांत झील जैसा दिखता है। ओसोरियो भाग्यशाली रहे और उन्होंने लगभग 700 किलो सोना निकाला। जिसकी 24 कैरेट के हिसाब से सोने की कीमत करीब 914 करोड़ रुपये बैठती है। उन्होंने इसका एक हिस्सा बैंक में जमा किया, दूसरा हिस्सा दो हवाई जहाज खरीदने में लगाया और बाकी उपकरणों में निवेश किया।                                                                                                                                                         खदान बंद, बैंक दिवालिया हुआ

सरकार ने 1992 में सुरक्षा कारणों से इस खदान को बंद कर दिया था। उस वक्त खनन पहले से ही कम हो रहा था हालांकि, जिस बैंक में ओसोरियो ने अपनी बचत जमा की थी, वह दिवालिया हो गया और उसके निवेश का केवल यह गड्ढा और कुछ खराब हालत वाली मशीनें ही बची हैं। सुरंग में उतरने के लिए झूले को सहारा देने वाली केबल घिसने लगी है और कोल्हू भी खराब हो गया है।                                                                                                                                                                                     ऐसे गुजरती है खनिकों की लाइफ

ओसोरियो की तरह कई पूर्व खनिक सेरा पेलाडा में ही रहते हैं। और ज्यादातर अपना दिन सहकारी समिति के मुख्यालय में डोमिनोज़ खेलते और किसी घटना के घटित होने का इंतज़ार करते हुए बिताते हैं। हालांकि, इंतजार करते-करते थककर कुछ खनिकों ने अकेले ही काम करने और गुप्त रूप से काम करने का फैसला किया है। वो ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं जिनसे पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर चिंताएं पैदा होती हैं। जैसे सोने को अलग करने के लिए पारे का इस्तेमाल, जो जलभंडार और नदियों को दूषित करता है।             हर हफ्ते 200 ग्राम नगेट्स मिलते हैं

अवैध खनन के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के बावजूद 65 वर्षीय व्यापारी कार्लोस ऑरेलियो ने EFE से बातचीत में कबूल किया कि उन्हें हर हफ्ते औसतन 200 ग्राम नगेट्स मिलते हैं, जिन्हें वे एक छोटे प्लास्टिक कंटेनर में रखते हैं। यह पहले जितने टन तो नहीं हैं, लेकिन यह इस बात का सबूत है कि उनकी दौलत खत्म नहीं हुई है।                            

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