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उत्तर प्रदेश :- वाराणसी न्यूज : मोदी के गोद लिए गांव ने तोड़ा चीन का वर्ल्ड रेकॉर्ड, गंगा किनारे 'मिनी काशी' का नजारा....

Abhyuday Bharat News / Mon, Mar 2, 2026 / Post views : 153

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वाराणसी के सूजाबाद-दोमरी गांव में प्रशासन ने एक घंटे के भीतर 2,51,446 446 पौधे रोपे। इस उपलब्धि को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने जगह दी है।

वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2018 में गोद लिए गए सूजाबाद-दोमरी गांव ने रविवार को हरियाली के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया। नगर निगम की अगुवाई में एक घंटे में 2,51,446 446 पौधे रोपे गए। इससे 2018 में चीन के नाम दर्ज 1,53,981 पौधों लगाने का रेकॉर्ड टूट गया। इस उपलब्धि को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने आधिकारिक रूप से प्रमाणित किया।

गिनीज की टीम के ऋषि नाथ और निश्चल बारोट ने ड्रोन और डिजिटल गणना प्रणाली से नजर रखी। इसके बाद टीम ने आधिकारिक रूप से नए रेकॉर्ड की घोषणा करते हुए मेयर अशोक तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल को सर्टिफिकेट सौपा। वाराणसी दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सर्किट हाउस में पौधरोपण अभियान के बाद प्रस्तुतीकरण देखा और जुड़े लोगों को सम्मानित किया।


60 गंगा घाटों की प्रतिकृति बना 'शहरी वन'

इस  शहरी वन की सबसे अनूठी विशेषता इसकी बनावट और वैचारिक पृष्ठभूमि है। पूरे वन क्षेत्र को 60 अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक सेक्टर का नाम काशी के प्रसिद्ध गंगा घाटों जैसे -दशाश्वमेध, ललिता घाट, नया घाट, मणिकर्णिका घाट, केदार घाट, चौसट्टी घाट, मान मंदिर घाट और शीतला घाट के नाम पर रखा गया है। यह बनावट ऐसी है कि भविष्य में जब ये पौधे वृक्ष बनेंगे, तो गंगा किनारे एक हरा-भरा 'मिनी काशी' का स्वरूप नजर आएगा।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में यह उपलब्धि सिद्ध करती है कि काशी न केवल अपनी प्राचीन परंपराओं को संजोए हुए है, बल्कि पर्यावरण जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। ढाई लाख पौधों की यह नई सौगात काशी के माथे पर एक और गौरवपूर्ण तिलक है।

अशोक कुमार तिवारी, महापौर


हर सेक्‍टर में 4 हजार से अधिक पौधे

प्रत्येक सेक्टर में लगभग 4,000 से अधिक पौधे लगाए गए हैं। इनमें शीशम, अर्जुन, सागौन और बांस जैसी 27 देशी प्रजातियों के साथ-साथ आम, अमरूद और पपीता जैसे फलदार वृक्षों और अश्वगंधा, शतावरी व गिलोय जैसी औषधियों को प्राथमिकता दी गई है। यह परियोजना न केवल पर्यावरण को सुधारेगी, बल्कि आने वाले समय में नगर निगम के लिए आय का एक बड़ा स्रोत भी बनेगी।


सिंचाई की स्मार्ट तकनीक

इन पौधों को जीवित रखने के लिए प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। वन क्षेत्र में 10,827 मीटर लंबी अत्याधुनिक पाइपलाइन बिछाई गई है। 10 बोरवेल और 360 'रेन गन' सिस्टम के जरिए सिंचाई की ऐसी व्यवस्था की गई है कि पानी की बर्बादी न हो। मियावाकी तकनीक के कारण ये पौधे सामान्य की तुलना में 10 गुना तेजी से बढ़ेंगे और मात्र दो से तीन वर्षों में यह क्षेत्र एक सघन 'ऑक्सीजन बैंक' का रूप ले लेगा। जापानी वनस्पति शास्त्री अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित यह तकनीक कम जगह में घना जंगल उगाने के लिए विश्व प्रसिद्ध है।


आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ

यह परियोजना केवल हरियाली तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर निगम के लिए आय का बड़ा स्रोत भी बनेगी। मध्य प्रदेश की एमबीके संस्था के साथ हुए समझौते के तहत तीसरे वर्ष से ही निगम को दो करोड़ रुपये की आय होने लगेगी, जो सातवें वर्ष तक सात करोड़ रुपये वार्षिक तक पहुँच सकती है।


पौधरोपण के दौरान मौजूद गणमान्य

कार्यक्रम के दौरान बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी , महापौर अशोक कुमार तिवारी, विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र राय, एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा, अश्वनी त्यागी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल व श्याम भूषण शर्मा उपस्थित रहे। महापौर ने कहा कि यह आध्यात्मिक शांति और आधुनिक अर्थशास्त्र का एक अनूठा उदाहरण है। प्रशासन की टीमें स्थल पर डटी रहीं और अंततः काशी ने विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।


इन विभागों के अधिकारी रहे मौजूद

भारतीय सेना, एनडीआरएफ, सीआरपीएफ, पीएसी, नमामि गंगे, वन व कृषि विभाग, काशी विद्यापीठ, यूपी कॉलेज और हजारों छात्रों-एनसीसी कैडेट्स की भागीदारी ने इसे जन आंदोलन का रूप दिया। अधिकारियों ने दावा किया कि गंगा पार यह 'मिनी काशी' आने वाले वर्षों में हरियाली और अर्थव्यवस्था का अनूठा मॉडल बनेगा।

Tags :

#uttarpradesh

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