Fri, 15 May 2026
Logo

ब्रेकिंग

छत्तीसगढ़: कोरबा में हाथियों का तांडव, फसलों को भारी नुकसान

अघोषित आपातकाल की ओर बढ़ रहा देश’— जयसिंह अग्रवाल का केंद्र सरकार पर हमला, महंगाई-ईंधन संकट पर उठाए सवाल...

’छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की पुनर्विकास योजनाओं (Re-development) में तेजी, शासन स्तर पर वि

रायपुर : ’इकोनॉमी के विकास के लिए वैल्यू एडिशन आधारित उत्पादन करना होगा -राज्यपाल डेका’

पति पत्‍नी और वो दो' मूवी रिव्‍यू

नमाज नहीं, लंदन से आएगी वाग्देवी की मूर्ति, भोजशाला परिसर मंदिर है, एमपी हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों ने दिल्ली में अमित शाह से की मुलाकात

आज का मौसम 15 मई: अगले 24 घंटे के अंदर 10 राज्यों में तूफानी बारिश का अलर्ट, 70 KM की रफ्तार से चलेगी हवा IMD की चेतावनी

तेल-गैस पर हाहाकार, लंबा खिंच रहा पश्चिम एशिया संकट, रूसी तेल पर छूट बढ़ाए अमेरिका, भारत की मांग

बाकी वसूली किस्तों में की जाएगी, जनता चुकाएगी कीमत; पेट्रोल-डीजल दाम बढ़ने पर भड़के राहुल गांधी

सूचना

: 24 नहीं 25 घंटे का होगा 1 दिन, किस कारण से होगा, जाने साइंस क़े 'चमत्कार'

Admin / Sat, Aug 3, 2024 / Post views : 214

Share:

Moon Drifting Away: धरती का प्राकृतिक उपग्रह चंद्रमा धीरे-धीरे हमसे दूर जा रहा है. इसके कारण आगे आने वाले वक्त में धरती पर 1 दिन पूरे 25 घंटे का हो सकता है.

नई दिल्ली. चांद सदियों से धरती के ऊपर आसमान में मौजूद है. यह कलाकारों, कवियों और रहस्यवादियों को प्रेरित करता रहा है, और बच्चों को मंत्रमुग्ध करता रहा है.बहरहास एक रिसर्च में कहा गया है कि हमारा प्राकृतिक उपग्रह चंद्रमा धीरे-धीरे धरती से दूर जा रहा है. यह खोज सीधे विज्ञान कथा से निकली हुई लगती है. मगर यह सावधानीपूर्वक वैज्ञानिक अवलोकन और विश्लेषण पर आधारित है. विस्कॉन्सिन-मैडिसन विश्वविद्यालय की एक टीम ने पता लगाया कि चंद्रमा के पृथ्वी से धीरे-धीरे दूर जाने के बड़े असर हो सकते हैं. अध्ययन में बताया गया है कि चंद्रमा पृथ्वी से लगभग 3.8 सेंटीमीटर प्रति वर्ष की दर से दूर जा रहा है. नए शोध के मुताबिक इसका हमारे ग्रह पर दिनों की लंबाई पर बहुत ज्यादा असर पड़ेगा. आखिरकार इसका नतीजा यह होगा कि अगले 20 करोड़ साल में धरती का एक दिन 25 घंटे का होगा. शोध से यह भी पता चलता है कि 1.4 अरब साल पहले, पृथ्वी पर एक दिन 18 घंटे से थोड़ा अधिक समय तक ही चलता था. यह घटना मुख्य रूप से पृथ्वी और चंद्रमा के बीच गुरुत्वाकर्षण संबंधों के कारण होती है. यह विशेष रूप से धरती और चंद्रमा द्वारा एक दूसरे पर लगाए गए ज्वारीय बलों के कारण होता है .विस्कॉन्सिन-मैडिसन विश्वविद्यालय में भूविज्ञान के प्रोफेसर स्टीफन मेयर्स ने कहा कि पृथ्वी एक घूमते हुए फिगर स्केटर की तरह होती है. जैसे-जैसे चंद्रमा दूर होता जाता है, तो वह अपनी भुजाओं को फैलाते हुए धीमी हो जाती है. चंद्रमा का धरती से दूर जाना कोई नई खोज नहीं है. यह दशकों से पता है. हालांकि विस्कॉन्सिन-मैडिसन विश्वविद्यालय का अध्ययन इस घटना के ऐतिहासिक और भूवैज्ञानिक संदर्भ में गहराई से पड़ताल करता है. शोधकर्ताओं ने अरबों साल में पृथ्वी-चंद्रमा सिस्टम के इतिहास का पता लगाया है. उनके निष्कर्षों से पता चलता है कि चंद्रमा की मौजूदा पीछे हटने की दर अपेक्षाकृत स्थिर है. जबकि पृथ्वी की घूर्णन गति और महाद्वीपीय बहाव सहित विभिन्न कारकों के कारण भूवैज्ञानिक समय-सीमा में इसमें उतार-चढ़ाव आया है.

Tags :

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

जरूरी खबरें

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

Related Posts