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राजस्थान :- अजमेर न्यूज : भजन संध्या में कव्वाली का 'तड़का' पड़ा भारी, अजमेर में जॉन अजमेरी को बीच में ही छोड़ना पड़ा मंच...

Abhyuday Bharat News / Mon, Mar 23, 2026 / Post views : 71

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अजमेर के शास्त्री नगर में आयोजित भजन संध्या रविवार रात विवादों में घिर गई। गायक जॉन अजमेरी की ओर से पिछले कार्यक्रम में कव्वाली गाने से नाराज हिंदू संगठनों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इसे धार्मिक परंपराओं के विरुद्ध बताया। हंगामा बढ़ता देख जॉन अजमेरी को बीच में ही मंच छोड़कर जाना पड़ा।

अजमेर: सूफी और भक्ति की सांझी विरासत के लिए मशहूर अजमेर में रविवार की रात उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब एक धार्मिक भजन संध्या विवादों के अखाड़े में तब्दील हो गई। शास्त्री नगर इलाके में आयोजित माता के जगराते में गायक जॉन अजमेरी की प्रस्तुति को लेकर हिंदू संगठनों ने ऐसा मोर्चा खोला कि गायक को बीच कार्यक्रम से ही उल्टे पांव लौटना पड़ा। भक्ति गीतों के बीच शुरू हुआ यह हंगामा देखते ही देखते शहर में चर्चा का विषय बन गया है।


अलवर गेट से शुरू हुई विवाद की 'चिंगारी'

दरअसल, इस पूरे विवाद की पटकथा एक दिन पहले ही लिख दी गई थी। बताया जा रहा है कि अलवर गेट क्षेत्र के नगरा में आयोजित एक अन्य जगराते में जॉन अजमेरी ने भजनों के साथ कव्वाली पेश कर दी थी। उस समय तो कार्यक्रम संपन्न हो गया, लेकिन कव्वाली की गूंज बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों के कान तक पहुंच गई। संगठनों का तर्क था कि शुद्ध सात्विक भजन संध्या में कव्वाली जैसी प्रस्तुति धार्मिक परंपराओं के विरुद्ध है।

शास्त्री नगर में 'आमने-सामने' आए संगठन और आयोजक

जैसे ही रविवार रात शास्त्री नगर में जॉन अजमेरी ने मंच संभाला, बजरंग दल के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में वहाँ पहुँच गए कार्यक्रम के बीच में ही कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते भजन संध्या का आध्यात्मिक माहौल नारों और बहसों में बदल गया। बजरंग दल के पदाधिकारियों का साफ कहना था कि 'धार्मिक आयोजनों की गरिमा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।'

तनाव के बीच गायक का 'एग्जिट'

हंगामा बढ़ता देख मौके पर मौजूद आयोजकों के हाथ-पांव फूल गए। स्थानीय लोगों और आयोजकों ने समझाइश की काफी कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी जॉन अजमेरी के मंच पर रहने के खिलाफ अड़े रहे। स्थिति को हाथ से निकलता देख और माहौल की गंभीरता को समझते हुए गायक जॉन अजमेरी ने बीच में ही माइक छोड़ा और मंच से उतरकर जाना ही मुनासिब समझा। उनके जाने के बाद ही हंगामा शांत हुआ और कार्यक्रम को दोबारा शुरू किया जा सका।

सांस्कृतिक स्वतंत्रता बनाम धार्मिक परंपरा

इस घटना के बाद अजमेर की गलियों में नई बहस छिड़ गई है। जहां एक पक्ष इसे धार्मिक मर्यादा और परंपराओं कि रक्षा बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे एक कलाकार की सांस्कृतिक स्वतंत्रता पर हमला मान रहा है। जानकारों का कहना है कि अजमेर जैसे गंगा-जमुनी तहजीब वाले शहर में इस तरह की घटना सामाजिक सौहार्द के लिए एक चुनौती है।

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