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Abhyuday Bharat News / Sun, Mar 1, 2026 / Post views : 106
मूसवी के पोते रूहुल्लाह खुमैनी का जन्म 1902 में हुआ। उन्होंने धर्म के साथ बड़े दार्शनिकों की किताबें पढ़ी। उस समय ईरान में पहलवी खानदार का शासन था। खुमैनी ने जमकर उनका विरोध किया। शासक ने उनको देश से निकाल दिया। एक अखबार ने उनको भारत का एजेंट बता दिया। आम जनता खुमैनी के पक्ष में सड़कों पर उतर आई। डरकर शासन ईरान छोड़कर भाग गया। 14 साल बाद खुमैनी वापस ईरान लौटे। 1979 में पहली बार ईरान में इस्लामी सरकार बनी। खुमैनी ईरान के पहले सुप्रीम लीडर बने।
1979 में ईरान में अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी ने इस्लामिक क्रांति की अगुवाई की। उनके इंकलाबी खुत्बों ने अमेरिका समर्थित शाह रजा पहलवी की सत्ता को जड़ से उखाड़ दिया। और तब ईरान एक आधुनिक राजा का मुल्क नहीं रहा। वो एक धर्म-राज्य बन गया, जहां संविधान से लेकर सड़कों तक, सब कुछ इस्लामी कानून के मुताबिक चलने लगा।
1989 में जब खुमैनी का निधन हुआ तो अयातुल्ला खामेनेई ने उनकी जगह ली और तब से राष्ट्रपति कोई और बनता है। फिलहाल देश के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान हैं। दिलचस्प बात यह है कि जब 1989 में अयातुल्ला अली खामेनेई ने सुप्रीम लीडर का पद संभाला तो संविधान में ही संशोधन करा लिया। वह 1989 से आजतक ईरान की बागडोर थामे हुए थे। ईरान को एक मजहबी तानाशाही में लाने में अयातुल्ला खामेनेई और उनके गुरु कहे जाने वाले रुहोल्लाह खुमैनी का बड़ा योगदान माना जाता है।
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#uttarpradesh
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