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उत्तर प्रदेश :- बाराबंकी न्यूज : ईरान के सर्वोच्‍च नेता रहे खामेनेई के गुरु खुमैनी का UP के बाराबंकी से क्‍या नाता है? जानिए पूरा किस्‍सा

Abhyuday Bharat News / Sun, Mar 1, 2026 / Post views : 272

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ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला अली खामेनेई अमेरिका और इजरायल के हमले में मारे गए। उनके गुरु रूहुल्‍लाह खुमैनी ने 1979 में ईरान में इस्‍लामिक क्रांति की थी।

बाराबंकी: अमेरिका और इजरायल के साथ जंग में ईरान के सर्वोच्‍च नेता अयातुल्‍ला अली खामेनेई की मौत के बाद भारत के कई हिस्‍सों में भी शोक की लहर देखी जा रही है। श्रीनगर के लाल चौक और पुराने लखनऊ के मु्स्लिम इलाकों में शिया समुदाय के लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। महिलाओं ने छाती पीटते हुए खामेनेई को शेर बताया। अमेरिका और इजरायल को धोखेबाज करार देते हुए प्रदर्शनकारियों ने मुर्दाबाद के नारे लगाए। क्‍या आपको पता है कि खामेनेई के गुरु रूहुल्‍लाह खुमैनी का यूपी के बाराबंकी से बहुत पुराना नाता है? आइए बताते हैं। 

1979 में जब ईरान में इस्‍लामिक क्रांति हुई तो उसके अगुवा रूहुल्‍लाह खुमैनी थे। खुमैनी के दादा सैयद अहमद मूसवी बाराबंकी के गांव किंतूर के रहने वाले थे। उनका जन्‍म यहीं हुआ था। सिरौलीगौसपुर तहसील के किंतूर गांव में शिया मुस्लिम सैयद अहमद मूसवी का जन्‍म हुआ था। वर्ष 1830 में 40 साल की उम्र में वह पहली बार धार्मिक यात्रा पर इराक गए। वहां से ईरान पहुंचे और वहीं के एक गांव खुमैन में बस गए। अहमद मूसवी ने अपने नाम के आगे उपनाम हिंदी जोड़ा। लोग उन्‍हें सैयद अहमद मूसवी हिंदी के नाम से पुकारने लगे।


खुमैनी बने ईरान के पहले सुप्रीम नेता

मूसवी के पोते रूहुल्‍लाह खुमैनी का जन्‍म 1902 में हुआ। उन्‍होंने धर्म के साथ बड़े दार्शनिकों की किताबें पढ़ी। उस समय ईरान में पहलवी खानदार का शासन था। खुमैनी ने जमकर उनका विरोध किया। शासक ने उनको देश से निकाल दिया। एक अखबार ने उनको भारत का एजेंट बता दिया। आम जनता खुमैनी के पक्ष में सड़कों पर उतर आई। डरकर शासन ईरान छोड़कर भाग गया। 14 साल बाद खुमैनी वापस ईरान लौटे। 1979 में पहली बार ईरान में इस्‍लामी सरकार बनी। खुमैनी ईरान के पहले सुप्रीम लीडर बने।


शाह रजा पहलवी की सत्ता को उखाड़ फेंका

1979 में ईरान में अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी ने इस्लामिक क्रांति की अगुवाई की। उनके इंकलाबी खुत्बों ने अमेरिका समर्थित शाह रजा पहलवी की सत्ता को जड़ से उखाड़ दिया। और तब ईरान एक आधुनिक राजा का मुल्क नहीं रहा। वो एक धर्म-राज्य बन गया, जहां संविधान से लेकर सड़कों तक, सब कुछ इस्लामी कानून के मुताबिक चलने लगा।


खुमैनी के निधन के बाद खामेनेई ने संभाली बागडोर

1989 में जब खुमैनी का निधन हुआ तो अयातुल्ला खामेनेई ने उनकी जगह ली और तब से राष्ट्रपति कोई और बनता है। फिलहाल देश के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान हैं। दिलचस्प बात यह है कि जब 1989 में अयातुल्ला अली खामेनेई ने सुप्रीम लीडर का पद संभाला तो संविधान में ही संशोधन करा लिया। वह 1989 से आजतक ईरान की बागडोर थामे हुए थे। ईरान को एक मजहबी तानाशाही में लाने में अयातुल्ला खामेनेई और उनके गुरु कहे जाने वाले रुहोल्लाह खुमैनी का बड़ा योगदान माना जाता है।

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#uttarpradesh

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