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यहां न सिर्फ इमारतें और सरकारी संरचनाएं सफेद रंग में हैं बल्कि वाहनों के लिए भी यही रंग अनिवार्य कर दिया गया. यदि कोई व्यक्ति काली या किसी अन्य रंग की कार खरीद ले तो वह उसे चला नहीं सकता. पुलिस तुरंत वाहन को जब्त कर लेती है और कार मालिक पर भारी जुर्माना भी लगाया जाता है. कार तब तक वापस नहीं मिलती जब तक उसे नियमों के अनुसार फिर से रंगा न जाए या कानूनी औपचारिकताएं पूरी न हो जाएं. इसका असर यह हुआ कि यहां सफेद और चांदी जैसे हल्के रंगों की ही कारें दिखाई देती हैं. नियम ने शहर को बनाया सुंदर दिलचस्प बात यह है कि यहां का रंग नियम सिर्फ वाहनों तक सीमित नहीं है. शहर के डिजाइन, सजावट, सरकारी विज्ञापन और सार्वजनिक कला में भी वही सफेद सौंदर्य बनाए रखना जरूरी है. कई देशों में वास्तुकला अलग अलग शैलियों का मिश्रण होती है, लेकिन अश्गाबात को देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी ने पूरे शहर को एक ही थीम पर तैयार किया हो. यहां के सरकारी भवन, मॉल, होटल, पार्क और यहां तक कि उनके अंदर की सजावट भी सफेद रंग को ही प्राथमिकता देती है.
इस शहर में घूमते हुए आंखें जहां भी जाएं, सफेदी ही नजर आती है. यही वजह है कि यहां की खूबसूरती अपने आप में अद्वितीय लगती है. पर्यटक यहां सिर्फ घूमने नहीं आते, बल्कि इस शहर की असाधारण वास्तुकला और अनोखे नियमों को देखने भी आते हैं.
तुर्कमेनिस्तान का यह सफेद शहर दुनिया को यह दिखाता है कि कानून सिर्फ व्यवस्था के लिए नहीं बनते, कभी कभी नियम किसी जगह की पहचान भी बन जाते हैं. यहां सफेद रंग सिर्फ एक रंग नहीं बल्कि इस शहर की शैली और सोच का प्रतीक बन चुका है.
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