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नेपाल में बालेन शाह की सरकार आते ही चीन ने काठमांडू में अपनी पैठ जमाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। इसके लिए बीजिंग खजाना खोलने को भी तैयार है। चीन ने नेपाल को 11 अरब रुपये का अनुदान का वादा किया है।
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काठमांडू: नेपाल में बालेन शाह की सरकार को लुभाने के लिए चीन अपना खजाना काठमांडू के लिए खोल रहा है। चीन ने काठमांडू रिंग रोड़ विस्तार परियोजना के दूसरे चरण के लिए 11 अरब नेपाली रुपये का अनुदान देने वादा किया है। बुधवार को नेपाल के भौतिक बुनियादी ढांचा, परिवहन और शहरी विकास मंत्रालय में इस संबंध में एक समझौता हुआ है। इस समझौते नेपाल के मंत्री सुनील लमसाल और नेपाल में चीन के राजदूत झांग माओमिंग ने हस्ताक्षर किए।
समझौते के तहत, नेपाल के कलंकी से बसुंधरा तक के रिंग रोड हिस्से का विस्तार किया जाएगा। कोटेश्वर से कलंकी तक परियोजना का पहला चरण पहले ही पूरा हो चुका है। हस्ताक्षर समारोह के दौरान बालेन शाह की सरकार में मंत्री लमसाल ने कहा कि सरकार परियोजना का सुचारू रूप से क्रियान्वयन सुनिश्चित करेगी।
काठमांडू के लिए बीजिंग के अनुदान की घोषणा ऐसे समय में हुई है जब इसी मार्च में चीन ने अपनी 15वीं पंचवर्षीय योजना को अंतिम रूप दिया। वहीं, बीते मार्च में ही नेपाल ने आम चुनाव में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को एकल-बहुमत पार्टी के रूप में सरकार के लिए चुना है। चीन की पंचवर्षीय योजना में जहां कूटनीतिक कार्यसूची में पड़ोसी को सबसे पहले रखा है, वहीं नेपाल की नई सत्ताधारी पार्टी पड़ोसियों के साथ विकास की कूटनीति पर जोर देती है।
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र कहे जाने वाले चाइना डेली के एक लेख में नेपाल को बीजिंग के लिए दक्षिण का प्रवेश द्वार बताया गया है। इसमें कहा गया है कि नेपाल तेजी से बढ़ते प्रमुख क्षेत्रीय बाजारों को जोड़ने वाले एक पुल के रूप में काम कर सकता है। नेपाल की बालेन शाह सरकार भी नेपाल को एक बफर स्टेट से क्षेत्रीय शक्तियों के बीच एक पुल के रूप में विकसित करने की बात कर चुकी है।
चाइना डेली के लेख में चीन की बेल्ट और रोड पहल की तरफ नेपाल को लुभाने की कोशिश की गई है। यह खास तौर पर ऐसे समय में हो रहा है, जबबालेन शाह सरकार का चीन को लेकर सख्त रुखहै। इसमें कहा गया है कि BRI का बड़े प्रोजेक्ट्स से हटकर छोटे और स्मार्ट विकास प्रोजेक्ट्स पर जोर देना नेपाल के लिए खास है। इसके अनुसार, BRI के तहत प्रोजेक्ट्स को गति देने से नेपाल की कनेक्टिविटी और आर्थिक स्थिति में कायापलट हो सकता है। इसमें अपील की गई है कि दोनों देशों के नेताओं को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए और संबंधों को व्यावहारिक लाभ में बदलना चाहिए।
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