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बीजेपी ने पिछले कुछ महीनों में जब राज्यों में संगठन की नई टीम का चयन किया तो राष्ट्रीय आरएसएस बैकग्राउंड वाले नेताओं को तरजीह दी। इस बार चुनाव में भी टीएमसी से लोगों को नहीं लिया गया, जैसा पिछले चुनाव में हुआ था। इसलिए यह भी संभावना है कि बीजेपी अपना पहला सीएम किसी ऐसे नेता को बनाए जो शुरू से पार्टी की विचारधारा से जुड़ा हो और संघ बैकग्राउंड का हो। बीजेपी के एक नेता ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि संघ एंगल देखने पर मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष साभिक भट्टाचार्य और दिलीप घोष का नाम सामने आता है। दिलीप घोष ने राज्य में बीजेपी का जनाधार बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। साभिक को बूथ स्तर के प्रबंधन में माहिर माना जाता है। वे 1974 से ही संघ से जुड़े रहे। बंगाल बीजेपी में संघ बैकग्राउंड के और नेता भी हैं।
बीजेपी ने बंगाल में टीएमसी को ये कहकर घेरा कि न यहां रोजगार है न इंडस्ट्री, इसलिए युवा पलायन कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी चाहेगी कि सरकार का चेहरा इंडस्ट्री फ्रेंडली हो, जिससे राज्य में बीजेपी अपने वादे पूरे कर सके।
ये भी चर्चा है कि क्या बीजेपी बंगाल में मध्य प्रदेश या राजस्थान जैसा प्रयोग कर बड़े चेहरे की जगह किसी कम जाने पहचाने चेहरे को सामने कर सकती है? हालांकि बंगाल जैसे राज्य में इसकी संभावना कम लगती है। मध्य प्रदेश, राजस्थान में बीजेपी पहले से ही मजबूत रही है और सरकार में भी रही है। जब ओडिशा में बीजेपी की पहली बार सरकार बनी तो मोहन चरण माझी को सीएम बनाया। हालांकि माझी छात्र जीवन से ही संघ से जुड़े रहे।
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