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Abhyuday Bharat News / Tue, Jun 16, 2026 / Post views : 4
अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब जांच का फोकस सिर्फ संदिग्ध कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर में चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़े कर्मचारियों की तैनाती में बैंक, आउटसोर्सिंग कंपनी और ट्रस्ट की भूमिका जांच के घेरे में है।
बड़ा खुलासा यह है कि बैंक ने कर्मचारियों को कंपनी के जरिए आउटसोर्सिंग पर रखा था, लेकिन कर्मचारी ट्रस्ट की ओर से तय किए गए थे। यानी जिन लोगों को चढ़ावे की गिनती जैसे संवेदनशील काम में लगाया गया, वे या तो किसी पदाधिकारी के परिचित बताए जा रहे हैं या उनसे जुड़ा नेटवर्क रखते थे।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों का न तो उचित सत्यापन हुआ, न नियमित तलाशी, न प्रभावी निगरानी। ट्रस्ट के कर्मचारी आईकार्ड लगाकर परिसर में आसानी से घूमते थे। सुरक्षा में पुलिस और अर्द्धसैनिक बल तैनात होने के बावजूद ट्रस्ट कर्मियों की आवाजाही पर वैसी सख्ती नहीं दिखी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जिन संदिग्धों के पास से रकम बरामद हुई, वे 12 से 18 हजार रुपये महीने पर काम कर रहे थे, लेकिन दिन-रात मंदिर परिसर में रहते थे। अब जांचकर्ता यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इतने कम वेतन वाले कर्मियों के पास अचानक बड़ी रकम, संपत्ति और निवेश कैसे आए।
सबसे बड़ा सवाल चढ़ावे के हिसाब पर है। दानपात्रों में आने वाली रकम पहले से बेहिसाब होती थी। गिनती के दौरान ही असली खेल होने की आशंका जताई गई है। जो रकम रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हुई, वह हिसाब से बाहर रह गई। इसी वजह से वास्तविक गबन कितने करोड़ का है, इसका पता लगाना बेहद कठिन हो सकता है।
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