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Abhyuday Bharat News / Mon, May 4, 2026 / Post views : 2
नीट के नियमों के मुताबिक, दोपहर 1:30 बजे सेंटर का मुख्य गेट बंद कर दिया गया था। विदुषी सिर्फ 3 मिनट लेट थी। शुरुआत में अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए प्रवेश से मना कर दिया। विदुषी की आंखों में आंसू थे और चाचा के चेहरे पर बेबसी। उनके चाचा ने अफसरों के सामने हाथ जोड़कर विनती की, 'साहब, इस बच्ची के भविष्य के लिए हमने सब कुछ दांव पर लगा दिया है, इसे अंदर जाने दीजिए।
नियमों की सख्ती के बीच अधिकारियों का दिल पसीज गया। विदुषी को दौड़कर अंदर भेजा गया। एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली विदुषी ने अंदर जाते समय अधिकारियों का आभार जताया। उसका सपना डॉक्टर बनकर मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों मेंलोगों की सेवाकरना है। विदुषी के परिवार ने इसे किसी चमत्कार से कम नहीं बताया।
आमतौर पर नीट जैसी परीक्षाओं में एक मिनट की देरी पर भी एंट्री नहीं दी जाती, लेकिनभोपाल पुलिसऔर एग्जाम सेंटर के स्टाफ ने जो लचीलापन दिखाया, उसकी हर तरफ सराहना हो रही है। लोग कह रहे हैं कि नियम इंसानों के लिए होते हैं, इंसानों को नियमों के लिए कुर्बान नहीं किया जाना चाहिए।
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