ब्रेकिंग
सूचना
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते हमेशा से तल्ख नहीं थे। हालांकि, 2021 में काबुल के अंदर तालिबान की सत्ता में वापसी हुई। इसी के बाद से उनके बीच टकराव बढ़ा, जो इस समय सबसे भीषण संघर्ष तक पहुंच गया है। हालांकि, अब दोनों पड़ोसी देशों को समझाने और सैन्य संघर्ष को समाप्त करने के प्रयास शुरू हुई। दोनों ही देशों के रणनीतिकार चीन में वार्ता कर रहे हैं।
बीजिंग अपने सुरक्षा हितों के लिए दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने में सहायता कर रहा है। इसी के साथ चीन की कोशिश काबुल पर नई दिल्ली के प्रभाव को नियंत्रित करने की भी है। चीन ने इन घटनाक्रम को लेकर अहम टिप्पणी की है। पड़ोसी देश ने कहा कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच वार्ता में लगातार प्रगति हो रही है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि बातचीत की प्रक्रिया को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है और इसमें प्रगति भी हो रही है। तीनों पक्षों ने मीडिया कवरेज सहित एक विशिष्ट परिचालन पद्धति पर सहमति और व्यवस्थाएं बना ली हैं। पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष में हालिया वृद्धि के बाद से, चीन अपने तरीके से मध्यस्थता और वार्ता को बढ़ावा दे रहा है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि हम अलग-अलग चैनलों और स्तरों के माध्यम से दोनों पक्षों के साथ घनिष्ठ संपर्क बनाए हुए हैं। हमारी कोशिश संवाद के लिए परिस्थितियां और मंच प्रदान करना है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश चीन के मध्यस्थता प्रयासों को महत्व देते हैं और उनका स्वागत भी कर रहे हैं। इसके साथ ही बातचीत के लिए फिर से बैठने को तैयार हैं, जो एक पॉजिटिव डेवलपमेंट है।
जानकारों के मुताबिक, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण संबंध ड्रैगन को भी परेशान कर रहे। ये टकराव चीन के क्षेत्रीय हितों के खिलाफ काम कर रहे। ऐसा इसलिए क्योंकि अफगानिस्तान में कई चीनी कामगार मौजूद हैं और अफगानिस्तान को चीन से अलग करने वाला एक संकरा गलियारा है। बीजिंग को हमेशा से इस गलियारे के माध्यम से शिनजियांग क्षेत्र में उग्रवाद के प्रसार का डर रहा है। चीन को अफगानिस्तान में सक्रिय पूर्वी तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट को लेकर भी चिंताएं हैं।
हालांकि, अफगानिस्तान में बीआरआई प्रोजेक्ट में अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है। ये भी चीन को बेहद परेशान कर रहा है। यही नहीं ड्रैगन की नजर भारत और तालिबान के बीच बढ़ते संबंधों पर भी है, इससे चीन परेशान है। अफगान विशेषज्ञों के अनुसार, जिस तरह से भारत ने हाल के समय में अफगानिस्तान की ओर मदद के हाथ बढ़ाए हैं और बातचीत आगे बढ़ रही ये भी चीन को रास नहीं आ रहा। इसी वजह से बीजिंग भारत पर लगाम कसने के लिए पाकिस्तान को अफगानिस्तान के साथ संबंध फिर से मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश में जुटा है।
Tags :
# International News
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन