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भारत में इजरायल के राजदूत रुवेन अजार ने कहा-हम पाकिस्तान को भरोसेमंद खिलाड़ी नहीं मानते हैं। मेरा मानना है कि अमेरिका ने अपनी वजहों से पाकिस्तान की सुविधा का इस्तेमाल किया है।
रुवेन अजार ने कहा कि हमने पहले भी देखा है कि अमेरिका ने कैसे समस्या खड़ी करने वाले देशों कतर और तुर्की को भी मैनेज किया। अमेरिका ने हमास से समझौते कराने के फायदे के लिए इन देशों का इस्तेमाल किया।
अजार ने कहा-हमारे लिए यह बेहद अहम है कि हम अमेरिका के साथ तालमेल बिठाए रखें। वह भी जब बात किसी ठोस नतीजे पर पहुंचने की हो और जो हम देखना चाहते हैं।
वहीं, अमेरिका-ईरान युद्ध में भारत की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉ. माजिद हकीम इलाही ने कहा कि हमारे राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन या इससे ज्यादा बार बात की। यह बहुत अच्छा था। कई बार भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी ईरान के विदेश मंत्री अराघची से भी बात की।
इलाही ने कहा-भारत में हमारे भाई-बहनों के बारे में मैं बयां नहीं कर सकता। मैं जब भी उनको याद करता हूं तो भावुक हो जाता हूं। वे अभूतपूर्व हैं। मैं इन अच्छे लोगों की वॅल्यु को शब्दों में बया नहीं कर सकता है। मैं भारत में अपने सभी खूबसूरत भाइयों-बहनों को बधाई देता हूं। वो असाधारण लोग हैं।
एक एक्सपर्ट ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा-भारत ने कभी भी देश के मामलों में दखल नहीं दिया है।वह पाकिस्तान के मामले में भी किसी तीसरे का दखल बर्दाश्त नहीं करता रहा है।
एक्सपर्ट ने कहा-भारत ने कभी रूस-यूक्रेन संघर्ष में मध्यस्थता नहीं की।वह हमेशा से दोनों पक्षों के साथ संपर्क में रहा है। भारत ने इसी तरह अमेरिका-ईरान युद्ध से भी दूरी बनाए रखी। हालांकि, उसने लगातार दोनों पक्षों से बात की। उसका मानना है कि सीधे बातचीत और कूटनीति से मसले सुलझाए जा सकते हैं।
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