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Admin / Fri, Aug 2, 2024 / Post views : 242
ABN EXPRESS NEWS 24x7
नई दिल्ली। शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक रोजगार में सीटें आरक्षित करने के उद्देश्य से अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के भीतर उप-वर्गीकरण की अनुमति देने वाले सुप्रीम कोर्ट के गुरुवार के फैसले के व्यापक परिणाम होंगे. यह राज्य को अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए निर्धारित कोटे के भीतर उप-समूहों के लिए सीटें आरक्षित करने की अनुमति देता है, जो उप-समूह की अधिक पिछड़ी या वंचित स्थिति पर आधारित है.
सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की संविधान पीठ ने 6:1 के फैसले में यह फैसला सुनाया. पीठ के 565 पन्नों के फैसले में छह अलग-अलग राय शामिल हैं.
भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ द्वारा स्वयं और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा के साथ ही न्यायमूर्ति बीआर गवई, विक्रम नाथ, पंकज मिथल और सतीश चंद्र शर्मा द्वारा लिखे गए फैसले बहुमत की राय हैं. न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी के फैसले में एकमात्र असहमतिपूर्ण राय निहित है.
गवई, नाथ, मिथल और शर्मा ने अपने निर्णयों में यह भी सुझाव दिया कि राज्य अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण में “क्रीमी लेयर” के सिद्धांत को शामिल करे, जिसका उद्देश्य समूह के भीतर धनी और अधिक समृद्ध सदस्यों को लाभों से बाहर रखना है.
चूंकि क्रीमी लेयर सिद्धांत का अनुप्रयोग पीठ के समक्ष प्रश्नों में से एक नहीं था और अदालत की सुनवाई के दौरान इस बारे में कोई तर्क नहीं दिया गया था, इसलिए इन सुझावों में कानूनी प्रवर्तनीयता का अभाव है
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