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नई दिल्ली: भारतीय खुफिया और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रहा कुख्यात गैंगस्टर वेंकटेश गर्ग जॉर्जिया से प्रत्यर्पित (Extradition) होकर भारत लाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार वह गुरुवार को दिल्ली पहुंच सकता है। गर्ग दिल्ली और हरियाणा में दर्ज एक दर्जन से अधिक आपराधिक मामलों में वांछित है और उस पर विदेश में बैठकर संगठित अपराध सिंडिकेट संचालित करने के आरोप हैं।
वेंकटेश गर्ग को पिछले वर्ष जॉर्जिया की राजधानी त्बिलिसी में हिरासत में लिया गया था। उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड नोटिस जारी था। भारतीय एजेंसियों द्वारा साझा की गई खुफिया जानकारी के आधार पर जॉर्जियाई अधिकारियों ने कार्रवाई की थी। प्रत्यर्पण प्रक्रिया को तेज करने के लिए दिल्ली और हरियाणा पुलिस की एक संयुक्त टीम पिछले सप्ताह जॉर्जिया पहुंची थी, जबकि आवश्यक दस्तावेज विदेश मंत्रालय के माध्यम से पहले ही भेजे जा चुके थे।
जांच एजेंसियों के अनुसार गर्ग का नाम हरियाणा में बीएसपी के प्रदेश सचिव हरबिलास सिंह रज्जूमाजरा की हत्या में सामने आया था। 25 जनवरी 2025 को रज्जूमाजरा अपने दो साथियों के साथ कार में सफर कर रहे थे, तभी हमलावरों ने उनकी गाड़ी को रोककर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई थीं। मामले में भूमिका सामने आने के बाद हरियाणा पुलिस ने गर्ग पर दो लाख रुपये का इनाम घोषित किया था, जिसके बाद वह देश छोड़कर फरार हो गया।
पुलिस का आरोप है कि विदेश में छिपे रहने के दौरान गर्ग कपिल सांगवान गैंग के लिए रंगदारी वसूली का नेटवर्क संचालित कर रहा था। वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और अन्य राज्यों से शूटरों और सुपारी किलरों की भर्ती करता था। इन अपराधियों का इस्तेमाल हत्या, हमला और अन्य संगठित अपराधों को अंजाम देने के लिए किया जाता था।
जांच में सामने आया है कि गर्ग, लंदन से कथित तौर पर अपना अपराध सिंडिकेट संचालित करने वाले गैंगस्टर कपिल सांगवान का करीबी सहयोगी है। सांगवान पर रंगदारी, हत्या और हथियारों से जुड़े कई मामलों में संलिप्तता के आरोप हैं। इसके अलावा गर्ग को कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का भी करीबी माना जाता है, जिसका नेटवर्क भारत समेत कई देशों तक फैला हुआ है।
वेंकटेश गर्ग का प्रत्यर्पण भारत की उस व्यापक मुहिम का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत विदेशों में छिपकर अपराध संचालित करने वाले गैंगस्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का अनुमान है कि अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और यूरोप में दो दर्जन से अधिक भारतीय गैंगस्टर सक्रिय हैं, जो भारत में अपने गुर्गों के जरिए रंगदारी, तस्करी औरh संगठित अपराध के नेटवर्क चला रहे हैं। गर्ग की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण को इन अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्कों पर बड़ी चोट माना जा रहा है।
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